सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें जर्मनी में रहने वाले एक भारतीय पूर्व खगोल भौतिक विज्ञानी ने भारतीय पासपोर्ट सेवा प्रणाली की तारीफ की है। इस पोस्ट के बाद ऑनलाइन बहस शुरू हो गई है कि आखिर बड़े स्तर पर भारत की प्रशासनिक व्यवस्था कितनी प्रभावी और तेज है।
यह वायरल पोस्ट Mayukh Panja द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया गया है। उन्होंने भारत और जर्मनी में अपने दस्तावेज़ रिन्यूअल के अनुभव की तुलना करते हुए बताया कि भारत की प्रक्रिया उम्मीद से कहीं अधिक सुगम और व्यवस्थित रही।
पोस्ट के अनुसार, मयूख पांजा ने बताया कि उन्हें भारतीय पासपोर्ट रिन्यूअल के लिए अपॉइंटमेंट लेने में लगभग 30 दिन लगे। इसके बाद बर्लिन स्थित भारतीय दूतावास में दस्तावेज़ जमा करने के बाद नया पासपोर्ट प्राप्त होने में करीब 6 सप्ताह का समय लगा।
उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में कोलकाता पासपोर्ट कार्यालय और स्थानीय पुलिस का समन्वय शामिल था, जहां पुलिस ने उनके स्थायी पते का भौतिक सत्यापन किया। इसके बावजूद पूरी प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज और व्यवस्थित तरीके से पूरी हुई।
मयूख पांजा ने अपने पोस्ट में यह भी बताया कि भारत में पासपोर्ट दूतावास में नहीं छपते, बल्कि देश में ही प्रिंट होकर विदेशों में भेजे जाते हैं। उन्होंने इसे एक बड़े और जटिल लॉजिस्टिक सिस्टम का हिस्सा बताया, जो काफी प्रभावी ढंग से काम करता है।
इसके मुकाबले उन्होंने जर्मनी की व्यवस्था का जिक्र करते हुए बताया कि वहां विदेशी कार्यालय (Ausländerbehörde) में अपॉइंटमेंट लेने में ही लगभग 6 सप्ताह लग गए, जबकि नए रेजिडेंस कार्ड की प्रक्रिया पूरी होने में 8 सप्ताह तक का समय लग सकता है।
उन्होंने कहा कि यह दिलचस्प है कि भारत जैसे बड़े देश में, जहां व्यवस्था को अक्सर धीमा माना जाता है, वहां इतनी बड़ी और फैली हुई प्रणाली भी अपेक्षाकृत तेजी से काम करती है।
पोस्ट में उन्होंने यह भी लिखा कि वे भारत को लेकर “सतर्क आशावाद” रखते हैं। उनका मानना है कि देश में कई चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सकारात्मक बदलाव भी तेजी से देखने को मिले हैं।
इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स ने भारतीय सिस्टम की तारीफ की है, जबकि कुछ ने कहा कि अनुभव हर व्यक्ति और क्षेत्र के हिसाब से अलग हो सकता है।
कई यूजर्स का कहना है कि भारत की बड़ी आबादी और जटिल प्रशासनिक ढांचे के बावजूद पासपोर्ट जैसी सेवाओं का समय पर पूरा होना एक सकारात्मक संकेत है। वहीं कुछ लोगों ने सुधार की और जरूरत बताई है।
यह वायरल पोस्ट एक बार फिर इस बात पर चर्चा छेड़ रहा है कि भारत की सरकारी सेवाएं तेजी से डिजिटल और कुशल बन रही हैं, लेकिन अभी भी सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।

