गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया, जिससे अब दिल्ली-एनसीआर से लेकर पूर्वांचल और बिहार तक का सफर पहले की तुलना में काफी तेज और आसान हो गया है।
यह एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाता है और उत्तर प्रदेश के 12 प्रमुख जिलों—मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज—को आपस में जोड़ता है। इस रूट के शुरू होने से इन क्षेत्रों में न सिर्फ यात्रा आसान हुई है, बल्कि व्यापार, उद्योग और रोजगार के नए अवसर भी खुलने की उम्मीद है।
गंगा एक्सप्रेसवे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। फिलहाल यह 6 लेन का आधुनिक एक्सप्रेसवे है, जिस पर हाई-स्पीड ट्रैफिक के लिए सभी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं। इस प्रोजेक्ट पर करीब ₹36,230 करोड़ की लागत आई है।
यात्रा समय में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मेरठ से प्रयागराज का सफर, जो पहले 12 से 13 घंटे में पूरा होता था, अब सिर्फ 6 से 7 घंटे में किया जा सकेगा। इसी तरह दिल्ली से प्रयागराज का सफर लगभग 7 से 8 घंटे में, जबकि दिल्ली से वाराणसी का सफर 8 से 9 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। वहीं दिल्ली से पटना की यात्रा का समय भी पहले के मुकाबले काफी कम होकर लगभग 12 से 13 घंटे रह जाएगा।
यह एक्सप्रेसवे सिर्फ गति ही नहीं बल्कि सुरक्षा और आधुनिक तकनीक का भी बेहतरीन उदाहरण है। इसमें सीसीटीवी कैमरे, पेट्रोलिंग वाहन, एम्बुलेंस और ट्रॉमा सेंटर जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा शाहजहांपुर के पास 3.5 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी हवाई पट्टी भी बनाई गई है, जहां जरूरत पड़ने पर वायुसेना के विमान उतर सकते हैं।
गंगा एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच दूरी को कम करेगा और राज्य को आर्थिक रूप से और मजबूत बनाएगा। आने वाले समय में यह एक्सप्रेसवे उत्तर भारत की एक प्रमुख लाइफलाइन के रूप में उभर सकता है।

