27 Jul 2026, Mon

कच्चे तेल की कीमतों में 7% तक की भारी गिरावट, मिडिल-ईस्ट में तनाव कम होने से गिरे भाव

 

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। मध्य-पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के संकेत मिलने के बाद निवेशकों की सप्लाई संबंधी चिंताएं घटीं, जिसका सीधा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा। कारोबार के दौरान कच्चा तेल करीब 7 प्रतिशत तक फिसलकर 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। हालांकि बाद में कीमतों में कुछ सुधार भी दर्ज किया गया, लेकिन शुरुआती गिरावट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने से फिलहाल तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा घटा है। यही वजह है कि बाजार में बिकवाली बढ़ी और कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।

अमेरिका ने रोके सैन्य हमले

कमोडिटी बाजार के जानकारों के अनुसार, अमेरिका ने लगातार दूसरी रात ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं की। बताया जा रहा है कि शुक्रवार रात के बाद से अमेरिका ने अपने हमलों पर रोक लगा रखी है। दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई को सीमित किया है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े मुद्दों पर ओमान के साथ बातचीत शुरू की है।

इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों को उम्मीद है कि मध्य-पूर्व में तनाव और नहीं बढ़ेगा, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर तत्काल संकट की आशंका कम हुई है।

हालांकि, क्षेत्र में जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर क्षेत्र में सऊदी अरामको की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले का दावा किया है। इससे संकेत मिलता है कि ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े खतरे अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।

गिरावट के बावजूद इस महीने 40% महंगा है तेल

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोमवार की बड़ी गिरावट के बावजूद इस महीने कच्चे तेल की कीमतें अब भी करीब 40 प्रतिशत ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

इसकी प्रमुख वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में बना तनाव है। ये दोनों क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। खासतौर पर सऊदी अरब और खाड़ी देशों के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इन्हीं रास्तों से होकर गुजरता है। ऐसे में सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा की आशंका कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखती है।

किस भाव पर कारोबार कर रहा है कच्चा तेल?

सोमवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में तीनों प्रमुख क्रूड ऑयल बेंचमार्क गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।

  • WTI Crude करीब 4.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 85.55 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
  • Brent Crude लगभग 3.84 प्रतिशत टूटकर 93.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
  • वहीं Murban Crude में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 9.44 प्रतिशत फिसलकर 97.05 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।

हालांकि दिनभर के कारोबार के दौरान इनमें उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है।

WTI, Brent और Murban में क्या है अंतर?

दुनिया में कच्चे तेल की कीमत तय करने के लिए मुख्य रूप से WTI, Brent और Murban तीन प्रमुख बेंचमार्क का इस्तेमाल किया जाता है।

WTI (West Texas Intermediate) अमेरिका में उत्पादित हल्का और उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा तेल है, जिसका प्रमुख बाजार अमेरिका है।

Brent Crude उत्तरी सागर (North Sea) से निकलता है और यूरोप, अफ्रीका तथा एशिया के कई देशों के लिए प्रमुख मूल्य निर्धारण बेंचमार्क माना जाता है।

वहीं Murban Crude संयुक्त अरब अमीरात (अबू धाबी) में उत्पादित होता है। यह अपेक्षाकृत हल्का कच्चा तेल है और एशिया तथा मध्य-पूर्व के बाजारों में इसकी बड़ी मांग रहती है।

भारत के लिए क्या मायने?

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट देश के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। यदि यह नरमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो पेट्रोल और डीजल की लागत पर दबाव कम हो सकता है। साथ ही आयात बिल और महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, आने वाले दिनों में मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति और वैश्विक मांग-आपूर्ति का संतुलन ही तय करेगा कि कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में जाएंगी।

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