अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की बढ़ती उम्मीदों ने ग्लोबल ऑयल मार्केट में राहत का माहौल बनाया है। इसी के चलते सोमवार, 25 मई 2026 को कच्चे तेल की कीमतें पिछले दो हफ्तों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच समझौता हो जाता है तो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई में सुधार देखने को मिल सकता है, जिससे तेल की कीमतों पर दबाव कम होगा।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने शनिवार को बयान देते हुए कहा था कि वॉशिंगटन और तेहरान शांति समझौते से जुड़े एक “मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग” यानी समझौता ज्ञापन पर “काफी हद तक बातचीत पूरी कर चुके हैं।” ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक संकेत देखने को मिले और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस संभावित समझौते का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ सकता है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापारिक रास्तों में से एक माना जाता है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बाद यहां कई तरह की पाबंदियां और सुरक्षा संकट पैदा हो गए थे, जिससे दुनियाभर में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई प्रभावित हुई थी। इसी वजह से पिछले कुछ महीनों में तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला था।
बताया जाता है कि मिडिल ईस्ट में तनाव शुरू होने से पहले दुनिया भर में तेल और एलएनजी की हर पांच में से एक खेप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरती थी। ऐसे में अगर यह रास्ता पूरी तरह सामान्य होता है तो वैश्विक सप्लाई चेन में सुधार आने की उम्मीद है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाली वेबसाइट oilprice.com के मुताबिक सोमवार सुबह करीब 8 बजे Brent Crude की कीमत 4.51 डॉलर यानी 4.36 प्रतिशत गिरकर 99.03 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं West Texas Intermediate (WTI) क्रूड 4.45 डॉलर यानी 4.61 प्रतिशत टूटकर 92.15 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया।
सिर्फ कच्चा तेल ही नहीं बल्कि प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को प्राकृतिक गैस का भाव 0.55 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 2.891 डॉलर प्रति MMBtu पर कारोबार कर रहा था।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह भी तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। अमेरिकी कच्चा तेल 8 प्रतिशत से ज्यादा और ब्रेंट क्रूड करीब 5 प्रतिशत तक गिरा था। उस समय भी ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने ईरान पर संभावित हवाई हमलों को रोक दिया है ताकि बातचीत के लिए समय दिया जा सके।
हालांकि हालिया गिरावट के बावजूद तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। फरवरी के अंत में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर कार्रवाई शुरू होने के बाद से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में 30 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है, इस पर वैश्विक तेल बाजार की चाल काफी हद तक निर्भर करेगी।

