आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, कंप्यूटर और लैपटॉप का इस्तेमाल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई से लेकर नौकरी और मनोरंजन तक, लोग कई घंटे स्क्रीन के सामने बिताते हैं। इसका असर आंखों पर भी पड़ रहा है। बच्चों और युवाओं में आंखों से जुड़ी परेशानियां बढ़ने की एक वजह लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत भी मानी जाती है।
हर साल World Sight Day के मौके पर आंखों की सेहत और दृष्टि की देखभाल को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। आंखों की रोशनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए नियमित जांच के साथ कुछ आसान आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना जरूरी है।
आंखों की नियमित जांच जरूरी
आंखों से जुड़ी कई समस्याएं शुरुआत में साफ तौर पर दिखाई नहीं देतीं। ऐसे में केवल परेशानी होने पर ही आंखों की जांच कराने के बजाय समय-समय पर आंखों की जांच करवाना बेहतर माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों को डायबिटीज या ब्लड प्रेशर जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हैं या परिवार में ग्लूकोमा और अन्य आंखों की बीमारियों का इतिहास रहा है, उन्हें आंखों की जांच को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
बच्चों की आंखों की जांच भी बेहद जरूरी है। अगर बच्चा बार-बार सिरदर्द की शिकायत करता है, पढ़ते समय परेशानी होती है, लगातार आंखें मलता है, आंखें सिकोड़कर देखता है या स्कूल में बोर्ड देखने में दिक्कत महसूस करता है, तो उसकी नजर की जांच करानी चाहिए।
कंप्यूटर और लैपटॉप यूजर्स अपनाएं 20-20-20 नियम
जो लोग लंबे समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते हैं, उनके लिए 20-20-20 नियम बेहद उपयोगी आदत हो सकती है। लगातार स्क्रीन देखने से होने वाले डिजिटल आई स्ट्रेन को कम करने के लिए यह तरीका अपनाया जा सकता है।
इस नियम के तहत हर 20 मिनट बाद लगभग 20 फीट दूर किसी वस्तु को कम से कम 20 सेकंड तक देखना चाहिए। इससे लगातार पास की स्क्रीन पर फोकस करने से आंखों को थोड़ी राहत मिलती है।
इसके साथ ही स्क्रीन की ब्राइटनेस को आसपास की रोशनी के अनुसार रखना, आंखों से स्क्रीन की उचित दूरी बनाए रखना और काम के दौरान बार-बार पलकें झपकाना भी जरूरी है।
पर्याप्त नींद और सही रोशनी का रखें ध्यान
आंखों को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त नींद भी महत्वपूर्ण है। लगातार देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप देखने की आदत आंखों को थका सकती है। इसलिए नियमित और पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करनी चाहिए।
कंप्यूटर पर काम करते समय कमरे में पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। बहुत कम या बहुत तेज रोशनी में स्क्रीन देखने से आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेना भी फायदेमंद हो सकता है।
बच्चों की आंखों पर दें खास ध्यान
बच्चों में स्क्रीन टाइम को लेकर माता-पिता को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। मोबाइल या टैबलेट का लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल करने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक देना जरूरी है। बच्चों को बाहर खेलने और प्राकृतिक रोशनी में समय बिताने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा सकता है।
आंखों की सुरक्षा में न बरतें लापरवाही
खेलकूद, मशीनरी या केमिकल के साथ काम करते समय आंखों की सुरक्षा के लिए उचित आई प्रोटेक्शन पहनना जरूरी है। आंखों में चोट लगने की स्थिति में खुद से इलाज करने के बजाय जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
World Sight Day का उद्देश्य सिर्फ आंखों की बीमारी के इलाज पर ध्यान देना नहीं, बल्कि समय रहते सावधानी और नियमित देखभाल के जरिए दृष्टि संबंधी समस्याओं को रोकने के प्रति जागरूक करना भी है। रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।

