अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump की लोकप्रियता में हालिया सर्वेक्षण के अनुसार उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। The Washington Post, ABC News और Ipsos द्वारा संयुक्त रूप से किए गए इस सर्वे में ट्रंप की कुल स्वीकृति रेटिंग घटकर 37 प्रतिशत रह गई है। यह आंकड़ा नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सर्वे के अनुसार, अमेरिका में आर्थिक मुद्दों को लेकर जनता में असंतोष बढ़ा है, जिसका सीधा असर ट्रंप की लोकप्रियता पर पड़ा है। अर्थव्यवस्था के मामले में उनकी रेटिंग 7 अंकों की गिरावट के साथ 34 प्रतिशत पर आ गई है। वहीं, महंगाई को लेकर उनकी स्वीकृति रेटिंग घटकर 27 प्रतिशत रह गई, जो दर्शाता है कि बढ़ती कीमतों से आम नागरिक काफी परेशान हैं। जीवन-यापन की लागत के मुद्दे पर स्थिति और भी चिंताजनक रही, जहां केवल 23 प्रतिशत लोगों ने ही ट्रंप की नीतियों का समर्थन किया, जबकि 76 प्रतिशत लोगों ने असहमति जताई।
ईंधन की बढ़ती कीमतों और रोजमर्रा के खर्चों में वृद्धि ने आम अमेरिकी की जेब पर दबाव डाला है, जिससे सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों—खासतौर पर ईरान के साथ बढ़ते तनाव—ने भी ट्रंप प्रशासन की छवि को प्रभावित किया है। सर्वे में पाया गया कि 66 प्रतिशत अमेरिकियों ने ईरान से निपटने के ट्रंप के तरीके को लेकर असहमति जताई, जबकि केवल 33 प्रतिशत लोग उनके पक्ष में दिखाई दिए।
हालांकि, आव्रजन नीति के मामले में ट्रंप को अपेक्षाकृत बेहतर समर्थन मिला है। अमेरिका-मेक्सिको सीमा से जुड़े उनके फैसलों को 45 प्रतिशत लोगों ने समर्थन दिया, जबकि 54 प्रतिशत लोगों ने इसका विरोध किया। यह दर्शाता है कि इस मुद्दे पर देश में गहरी विभाजन रेखा मौजूद है।
सर्वे में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई कि बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक अब किसी भी राजनीतिक दल पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर रहे हैं। आव्रजन, अर्थव्यवस्था, अपराध और महंगाई जैसे प्रमुख मुद्दों पर 23 से 33 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें किसी भी पार्टी पर विश्वास नहीं है।
कुल मिलाकर, ट्रंप की अस्वीकृति रेटिंग बढ़कर 62 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो उनके कार्यकाल के दौरान अब तक का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है। हालांकि, Republican Party के समर्थकों के बीच उनकी पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है, जहां उन्हें लगभग 85 प्रतिशत समर्थन प्राप्त है।
यह सर्वे संकेत देता है कि आने वाले चुनावों में आर्थिक हालात, महंगाई और विदेश नीति जैसे मुद्दे निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, और ट्रंप प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

