4 May 2026, Mon

NCLAT ने खारिज की वेदांता की अपील, जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए अडाणी ग्रुप का रास्ता साफ

जेपी एसोसिएट्स डील: वेदांता को बड़ा झटका, NCLAT ने खारिज की याचिकाएं, अडाणी ग्रुप की बोली पर बढ़ी आगे की राह

नई दिल्ली: कर्ज में डूबी कंपनी Jaiprakash Associates Limited के अधिग्रहण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में बड़ा अपडेट सामने आया है। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने वेदांता लिमिटेड की दो याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद अब Adani Enterprises Limited की बोली को लेकर आगे की प्रक्रिया और मजबूत होती दिख रही है।

यह मामला जेपी एसोसिएट्स के दिवाला समाधान प्रक्रिया (Insolvency Resolution Process) से जुड़ा है, जिसमें कई बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया था। वेदांता ने आरोप लगाया था कि उसकी बोली वित्तीय रूप से अधिक थी, लेकिन फिर भी चयन प्रक्रिया में उसे नजरअंदाज किया गया।

वेदांता का दावा क्या था?
Vedanta Limited ने तर्क दिया था कि उसकी बोली सकल मूल्य (Gross Value) के आधार पर लगभग 3,400 करोड़ रुपये ज्यादा थी और शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV) के हिसाब से भी करीब 500 करोड़ रुपये अधिक थी। कंपनी का कहना था कि मूल्यांकन मानदंडों में पारदर्शिता नहीं रखी गई।

हालांकि, NCLAT की दो सदस्यीय पीठ ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि कर्जदाताओं की समिति (CoC) का निर्णय व्यावसायिक समझ और समग्र मूल्यांकन पर आधारित था। अदालत ने यह भी कहा कि समाधान प्रक्रिया में किसी तरह की गंभीर अनियमितता साबित नहीं हुई है।

अडाणी ग्रुप की बोली को मिली थी मंजूरी
इससे पहले, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने 17 मार्च को अडाणी ग्रुप की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी थी। इस बोली में वेदांता और डालमिया भारत को पीछे छोड़ दिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, कर्जदाताओं के 89 प्रतिशत वोट अडाणी एंटरप्राइजेज के पक्ष में गए थे, जिससे उसकी स्थिति मजबूत हो गई।

सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
वेदांता ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी थी, लेकिन वहां भी उसे अंतरिम राहत नहीं मिली। हालांकि, अदालत ने यह निर्देश जरूर दिया कि जेपी एसोसिएट्स की निगरानी समिति कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले अनुमति ले।

जेपी एसोसिएट्स की वित्तीय स्थिति
जेपी ग्रुप की प्रमुख कंपनी जेपी एसोसिएट्स पर करीब 57,185 करोड़ रुपये का भारी कर्ज है। इसी कारण जून 2024 में इसे कॉरपोरेट दिवाला प्रक्रिया में शामिल किया गया था। कंपनी के पास ग्रेटर नोएडा में जेपी ग्रीन्स जैसी बड़ी रियल एस्टेट परियोजनाएं और मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में सीमेंट प्लांट जैसे महत्वपूर्ण एसेट्स मौजूद हैं।

इसके अलावा कंपनी की कई सब्सिडरी इकाइयां भी हैं, जिनमें यमुना एक्सप्रेसवे टोलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।

आगे क्या?
NCLAT के इस फैसले के बाद अडाणी ग्रुप के लिए जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण की प्रक्रिया और आसान मानी जा रही है। अब केवल औपचारिक प्रक्रियाएं और नियामकीय मंजूरियां बाकी रह गई हैं।

यह मामला भारत के कॉरपोरेट रीस्ट्रक्चरिंग और बड़े अधिग्रहणों के इतिहास में एक अहम उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें मूल्यांकन और कर्ज समाधान की प्रक्रिया पर भी गंभीर बहस देखने को मिली है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *