ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। बताया जा रहा है कि इस अवसर पर दुनिया के कई देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हो सकते हैं।
अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन इसी वर्ष फरवरी में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों के दौरान हुआ था। इसके बाद ईरान में राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई थी और अब उनके अंतिम संस्कार के लिए विस्तृत कार्यक्रम तय किया गया है।
पांच दिनों तक चलेगा शोक कार्यक्रम
ईरानी मीडिया और आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत 5 जुलाई से होगी। शोक समारोह कई चरणों में आयोजित किए जाएंगे। 7 जुलाई को ईरान के पवित्र शहर Qom में विशेष धार्मिक सभाएं और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 9 जुलाई को अली खामेनेई को उनके गृहनगर और पवित्र शहर Mashhad में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान में मौजूदा परिस्थितियों और सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया सामान्य इस्लामी परंपराओं की तुलना में विलंब से आयोजित की जा रही है।
रिकॉर्ड भीड़ जुटने की संभावना
ईरानी अधिकारियों का अनुमान है कि तेहरान, क़ोम और मशहद में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में लगभग दो करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह 1989 में Ruhollah Khomeini के अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ का रिकॉर्ड तोड़ सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif सहित कई देशों के प्रतिनिधिमंडल भी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
ईरान में नेतृत्व परिवर्तन के बाद नई परिस्थितियां
अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और उनके पुत्र Mojtaba Khamenei ने देश के नए सर्वोच्च नेता के रूप में जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, हाल के दिनों में उनकी सेहत को लेकर विभिन्न तरह की अटकलें सामने आई हैं। अमेरिकी अधिकारियों की ओर से कुछ दावे किए गए हैं, लेकिन ईरान की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
ईरान-अमेरिका शांति वार्ता पर दुनिया की नजर
इस बीच, लंबे समय तक चले क्षेत्रीय तनाव के बाद ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। दोनों देशों के बीच हाल ही में एक अंतरिम समझौते पर सहमति बनी है और दीर्घकालिक शांति बहाली को लेकर उच्चस्तरीय वार्ताएं जारी हैं। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रतिबंध जैसे मुद्दे इन वार्ताओं के केंद्र में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अली खामेनेई का अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक और राष्ट्रीय आयोजन नहीं होगा, बल्कि यह मध्य पूर्व की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।

