उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां इटावा सफारी पार्क के पीछे स्थित बीहड़ वाले सैयद बाबा की मजार को जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई देर रात सुरक्षा व्यवस्था के बीच की गई और पूरी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण तरीके से पूरा किया गया।
जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई उस स्थान पर की गई जो वन विभाग की जमीन पर अतिक्रमण के रूप में चिन्हित किया गया था। कार्रवाई के दौरान सबसे पहले मजार के गुंबद, दरगाह और आसपास बने पक्के चबूतरे को हटाया गया। इसके बाद बुलडोजर की मदद से पूरे ढांचे को ध्वस्त कर मलबे को हटाया गया।
रात के अंधेरे में हुई कार्रवाई
प्रशासन ने इस पूरे अभियान को गोपनीय रखा और मीडिया को भी मौके पर सीमित पहुंच दी गई। संयुक्त कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। ध्वस्तीकरण के बाद मलबे को वहीं पास के जंगल क्षेत्र में दफना दिया गया।
कार्रवाई के बाद वृक्षारोपण
ध्वस्तीकरण के बाद उसी स्थान पर वन विभाग ने वृक्षारोपण अभियान भी चलाया। क्षेत्र में बड़े पौधे लगाने के साथ-साथ सैकड़ों छोटे पौधे भी रोपे गए। अब उस स्थान को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना बताई जा रही है।
दस्तावेज न मिलने पर कार्रवाई
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस स्थल के केयरटेकर को पहले ही नोटिस जारी किया गया था और उनसे जमीन एवं निर्माण से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था। लगभग पांच महीनों तक कई बार सुनवाई के बावजूद कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
इसके बाद वन विभाग की अदालत और प्रशासनिक आदेश के आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई नियमों के तहत और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई है।
प्रशासन ने साधी चुप्पी
इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारी खुलकर कुछ भी कहने से बचते नजर आए। हालांकि अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही जांच और अवैध कब्जे के मामलों की पुष्टि के बाद की गई है।
निष्कर्ष
इटावा की यह कार्रवाई एक बार फिर अवैध कब्जों और वन भूमि के उपयोग को लेकर प्रशासन की सख्ती को दर्शाती है। जहां एक ओर इसे नियमों के पालन के तहत उठाया गया कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय भी बना हुआ है। फिलहाल प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को हरित जोन में बदलने की दिशा में काम शुरू कर दिया है।

