नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और अब टूर्नामेंट में केवल दो मुकाबले शेष हैं। शुक्रवार को खेले जाने वाले क्वालीफायर-2 के बाद रविवार को फाइनल मुकाबला खेला जाएगा, जहां विजेता टीम ट्रॉफी पर कब्जा जमाएगी। इस बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ और मैच अधिकारियों के लिए एक अहम निर्देश जारी कर दिया है, जिसने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
बीसीसीआई ने आईपीएल मैचों के दौरान स्मार्ट सनग्लास के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह कदम बोर्ड की एंटी करप्शन यूनिट (ACU) की सिफारिश के बाद उठाया गया है। बोर्ड का मानना है कि आधुनिक तकनीक से लैस ये स्मार्ट ग्लास खेल की निष्पक्षता और सुरक्षा के लिए संभावित खतरा बन सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, कुछ कंपनियां खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को ऐसे स्मार्ट सनग्लास उपलब्ध करा रही थीं जिनमें कई एडवांस फीचर्स मौजूद हैं। इन डिवाइसेज के जरिए लाइव स्ट्रीमिंग, टेक्स्ट मैसेज भेजना और प्राप्त करना, कॉलिंग करना तथा इंटरनेट और वाई-फाई कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। ऐसे में मैच के दौरान इनका उपयोग किसी भी प्रकार की अनधिकृत जानकारी साझा करने या प्राप्त करने का माध्यम बन सकता है।
बीसीसीआई द्वारा जारी एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि मैच के दौरान खिलाड़ी, सपोर्ट स्टाफ और मैच अधिकारी स्मार्ट सनग्लास का उपयोग नहीं कर सकेंगे। इसके साथ ही खिलाड़ियों को अपने मोबाइल फोन की तरह इन डिवाइसेज को भी निर्धारित स्थान पर जमा कराना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल के वर्षों में क्रिकेट में भ्रष्टाचार और सुरक्षा से जुड़े मामलों को लेकर निगरानी बढ़ाई गई है। इससे पहले राजस्थान रॉयल्स के एक अधिकारी रोमी भिंडर मैच के दौरान डगआउट में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए कैमरे में कैद हो गए थे। इस घटना के बाद उन पर जुर्माना लगाया गया था और चेतावनी भी दी गई थी। उस मामले ने मैच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
बीसीसीआई पहले भी खिलाड़ियों की सुरक्षा और टूर्नामेंट की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कई सख्त नियम लागू कर चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खिलाड़ियों से मिलने के लिए अनधिकृत व्यक्तियों के होटल तक पहुंचने और संभावित हनी ट्रैप जैसे खतरों को देखते हुए भी बोर्ड ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए थे। खिलाड़ियों की गतिविधियों और संपर्कों पर विशेष निगरानी रखने के लिए कई सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच ऐसे कदम खेल की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी हो गए हैं। आईपीएल जैसे बड़े और वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय टूर्नामेंट में किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि को रोकने के लिए बोर्ड कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।
अब जबकि आईपीएल 2025 अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है, बीसीसीआई का यह फैसला साफ संकेत देता है कि खेल की निष्पक्षता और सुरक्षा को लेकर बोर्ड पूरी तरह सतर्क है। आने वाले मुकाबलों में सभी खिलाड़ियों और अधिकारियों को इन नए नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

