ईरान में IRGC का बढ़ता प्रभाव, सत्ता और फैसलों पर कड़ा नियंत्रण
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने देश के सैन्य और कूटनीतिक फैसलों पर अपनी पकड़ काफी मजबूत कर ली है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि ईरान में अब नीति निर्धारण में कट्टरपंथी रुख और ज्यादा हावी हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC के वरिष्ठ कमांडर Ahmad Vahidi और उनके करीबी सहयोगियों ने शीर्ष स्तर पर नेतृत्व की भूमिका संभाल ली है। इस बदलाव के चलते पहले से सक्रिय माने जाने वाले उदारवादी नेताओं को पीछे कर दिया गया है। खासतौर पर विदेश मंत्री Abbas Araghchi की भूमिका कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।
बताया जा रहा है कि हाल ही में ईरान के अंदर लिए गए कुछ अहम फैसलों को भी IRGC ने पलट दिया। उदाहरण के तौर पर, अराघची द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के संकेत दिए गए थे, लेकिन IRGC ने इस फैसले को नकारते हुए इसे बंद रखने पर जोर दिया। Strait of Hormuz वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है, ऐसे में इस पर नियंत्रण को लेकर तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिका स्थित Institute for the Study of War की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में भी IRGC का प्रभाव बढ़ा है। इस परिषद के सचिव Mohammad Bagher Zolghadr ने भी IRGC के साथ मिलकर रणनीतिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, IRGC ने न केवल सैन्य मामलों में बल्कि कूटनीतिक प्रक्रिया में भी हस्तक्षेप बढ़ा दिया है। हाल ही में ईरान की वार्ता टीम को वापस बुला लिया गया, जो अमेरिका के साथ संभावित बातचीत में शामिल थी। यह कदम इस बात का संकेत है कि अब ईरान की विदेश नीति पर भी IRGC का सीधा प्रभाव है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व का समर्थन भी शामिल है। Mojtaba Khamenei, जिन्हें देश के प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है, के साथ IRGC के करीबी संबंध बताए जाते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि आने वाले समय में ईरान की नीतियां और अधिक सख्त हो सकती हैं।
इस घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल सकता है। खासतौर पर United States और पश्चिमी देशों के साथ चल रही बातचीत पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। पहले से ही होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव और जहाजों पर हमलों की खबरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
भारत सहित कई देशों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। यहां किसी भी तरह की अस्थिरता से तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, ईरान में IRGC का बढ़ता प्रभाव न केवल देश की आंतरिक राजनीति को बदल रहा है, बल्कि वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा समीकरणों पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह बदलाव क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को किस दिशा में ले जाता है।

