नई दिल्ली: दुनिया की सबसे लोकप्रिय टी20 क्रिकेट लीग Indian Premier League आने वाले वर्षों में बड़े बदलावों के दौर से गुजर सकती है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और आईपीएल प्रबंधन भविष्य में टूर्नामेंट के प्रारूप को और विस्तारित करने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईपीएल में मैचों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ इसे दो अलग-अलग चरणों में आयोजित करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है।
यदि यह योजना लागू होती है, तो क्रिकेट प्रशंसकों को सिर्फ मार्च, अप्रैल और मई में ही नहीं, बल्कि सितंबर और अक्टूबर में भी आईपीएल मुकाबले देखने को मिल सकते हैं। हालांकि फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती विचार-विमर्श के स्तर पर है और इसके लागू होने में अभी कुछ वर्ष लग सकते हैं।
74 से बढ़कर 94 हो सकते हैं मैच
वर्तमान में आईपीएल में कुल 74 मुकाबले खेले जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से टूर्नामेंट को और बड़ा बनाने की चर्चा चल रही है। सूत्रों के अनुसार, भविष्य में मैचों की संख्या बढ़ाकर 94 तक की जा सकती है।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती लोकप्रियता, प्रसारण अधिकारों की बढ़ती कीमत और वैश्विक दर्शक वर्ग को देखते हुए अधिक मैच आयोजित करना आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हो सकता है। इससे फ्रेंचाइजी, प्रायोजकों और प्रसारण कंपनियों को भी अतिरिक्त अवसर मिलेंगे।
हालांकि, इतने अधिक मुकाबलों को लगातार एक ही विंडो में आयोजित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खिलाड़ियों के कार्यभार, मौसम और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए नए प्रारूप पर विचार किया जा रहा है।
दो फेज में आयोजित हो सकता है टूर्नामेंट
आईपीएल चेयरमैन Arun Kumar Dhumal ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में टूर्नामेंट को दो चरणों में विभाजित किया जा सकता है।
प्रस्तावित योजना के अनुसार, पहला चरण फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत से अप्रैल तक खेला जा सकता है। इसके बाद टूर्नामेंट का दूसरा चरण सितंबर से अक्टूबर के बीच आयोजित किया जा सकता है।
इस मॉडल का उद्देश्य खिलाड़ियों पर पड़ने वाले शारीरिक दबाव को कम करना और लंबे टूर्नामेंट को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करना है। साथ ही इससे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर के साथ बेहतर तालमेल भी बनाया जा सकेगा।
मौसम और खिलाड़ियों की फिटनेस भी अहम कारण
अप्रैल और मई के महीनों में भारत के अधिकांश हिस्सों में अत्यधिक गर्मी और उमस रहती है। ऐसे मौसम में लगातार मैच खेलने से खिलाड़ियों की फिटनेस और प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।
हाल के वर्षों में कई खिलाड़ियों को गर्मी और थकान के कारण चोटों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में टूर्नामेंट को दो हिस्सों में बांटने से खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम और रिकवरी का समय मिल सकता है।
सितंबर और अक्टूबर के दौरान भारत में मानसून लगभग समाप्त हो चुका होता है और मौसम अपेक्षाकृत अधिक अनुकूल रहता है। यही वजह है कि इस अवधि को संभावित दूसरे चरण के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
त्योहारी सीजन का मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर और अक्टूबर में आईपीएल आयोजित करने से व्यावसायिक लाभ भी बढ़ सकते हैं। इस दौरान देश में त्योहारों का मौसम शुरू हो जाता है, जब कंपनियां बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान चलाती हैं।
त्योहारी सीजन में दर्शकों की संख्या और विज्ञापन खर्च दोनों बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे प्रसारण कंपनियों और आईपीएल को अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। यही कारण है कि इस प्रस्ताव को व्यावसायिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2028 या 2029 में दिख सकता है नया प्रारूप
हालांकि आईपीएल के दो-चरणीय प्रारूप को लागू करने के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के फ्यूचर टूर प्रोग्राम और वैश्विक क्रिकेट कैलेंडर में समन्वय जरूरी होगा। इसलिए निकट भविष्य में इसके लागू होने की संभावना कम है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 2027 के बाद शुरू होने वाले अगले मीडिया और संचालन चक्र में इस मॉडल पर गंभीरता से काम किया जा सकता है। यदि सभी पक्ष सहमत होते हैं, तो 2028 या 2029 तक आईपीएल एक नए और विस्तारित स्वरूप में दिखाई दे सकता है।
क्रिकेट प्रशंसकों के लिए यह बदलाव रोमांचक साबित हो सकता है, क्योंकि इससे उन्हें पूरे साल अधिक आईपीएल क्रिकेट देखने का अवसर मिलेगा और लीग का वैश्विक प्रभाव भी और मजबूत हो सकता है।

