5 Sep 2026, Sat

‘अपनी खुन्नस मिटाने के लिए हमारी मस्जिद नहीं गिरा सकते’, असदुद्दीन ओवैसी ने बोला तीखा हमला

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को गिराए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मस्जिद को ढहाए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों को इस तरह हटाने की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

ओवैसी ने दावा किया कि कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद मस्जिद का इतिहास काफी पुराना है और उसके अस्तित्व से जुड़े 1911 तक के दस्तावेज उपलब्ध हैं। उनके मुताबिक, इन पुराने रिकॉर्ड से यह दावा किया गया है कि मस्जिद कलेक्ट्रेट की स्थापना से पहले से वहां मौजूद थी। उन्होंने इसी आधार पर प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं।

ओवैसी ने धार्मिक स्वतंत्रता पर उठाया सवाल

मस्जिद गिराए जाने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने धार्मिक आजादी के संवैधानिक अधिकार को लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि देश में हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक स्थलों पर इबादत करने का अधिकार संविधान से मिला हुआ है।

उन्होंने धार्मिक स्थलों को कमजोर या विवादित आधारों पर बुलडोजर की कार्रवाई के जरिए हटाए जाने पर भी आपत्ति जताई। ओवैसी का कहना है कि किसी धार्मिक स्थल को हटाने से पहले उससे जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों और कानूनी स्थिति को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

1911 के दस्तावेजों का किया जिक्र

ओवैसी ने अपने बयान में 1911 के दस्तावेजों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उनका दावा है कि मस्जिद कमेटी ने अदालत के सामने पुराने रिकॉर्ड पेश किए थे। इन दस्तावेजों के जरिए यह बताने की कोशिश की गई कि कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद का अस्तित्व सरकारी परिसर से पहले का है।

उनके अनुसार, यदि किसी धार्मिक स्थल के पुराने दस्तावेज मौजूद हैं तो उसकी स्थिति और इतिहास को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जानी चाहिए। इसी को आधार बनाकर उन्होंने मस्जिद गिराए जाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।

प्रशासन ने बताया अवैध निर्माण

वहीं, प्रशासन की ओर से मस्जिद को लेकर अलग पक्ष सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, कलेक्ट्रेट परिसर की जमीन सरकारी भूमि है और वहां मौजूद ढांचा अवैध निर्माण की श्रेणी में आता था। प्रशासन का कहना है कि संबंधित कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई।

इस पूरे मामले में एक तरफ धार्मिक स्थल के पुराने अस्तित्व और उससे जुड़े दस्तावेजों का मुद्दा उठाया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर प्रशासन जमीन और निर्माण की कानूनी स्थिति को कार्रवाई का आधार बता रहा है।

कार्रवाई के बाद बढ़ी सियासी हलचल

मस्जिद गिराए जाने के बाद इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। ओवैसी के बयान के बाद धार्मिक स्वतंत्रता, पुराने दस्तावेजों और सरकारी जमीन पर निर्माण से जुड़े सवाल चर्चा में आ गए हैं।

अब इस मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है। विवाद का मुख्य केंद्र यही है कि मस्जिद की ऐतिहासिक स्थिति और पुराने दस्तावेजों को किस तरह देखा जाता है तथा सरकारी भूमि पर निर्माण को लेकर अदालत के आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई का क्या आधार रहा है।

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