कोलकाता एयरपोर्ट परिसर में स्थित मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति से जुड़ा मामला अब कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंच गया है। गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई के दौरान एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था और ऑपरेशनल एरिया में लोगों की आवाजाही को लेकर चर्चा हुई। सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्ण राव ने हाल में सामने आई फ्लाईदुबई कॉकपिट घटना का भी संदर्भ दिया। कोर्ट ने फिलहाल मामले में कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है और अगली सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है।
मस्जिद में नमाज को लेकर क्या है विवाद?
यह मामला एयरपोर्ट परिसर में स्थित बकरा मस्जिद में नमाज पढ़ने पर लगी रोक से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि यहां लंबे समय से लोग नमाज अदा करते रहे हैं। पहले सुरक्षा व्यवस्था के तहत नमाज पढ़ने आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जाती थी।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, स्क्रीनिंग के बाद नमाजियों को बस के माध्यम से मस्जिद तक ले जाया जाता था। नमाज पूरी होने के बाद उन्हें वापस मुख्य सड़क की ओर लाया जाता था। उनका कहना है कि इस व्यवस्था में सुरक्षा जांच के बाद लोगों को मस्जिद तक पहुंचने की अनुमति दी जाती थी।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ने जताई सुरक्षा चिंता
सुनवाई के दौरान एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से मस्जिद की लोकेशन को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने रखी गईं। अधिकारियों के मुताबिक, मस्जिद एयरपोर्ट के ऑपरेशनल एरिया में स्थित है और रनवे के काफी नजदीक है।
बताया गया कि मस्जिद रनवे से करीब 165 मीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में लोगों की आवाजाही को लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी ने सावधानी बरतने की जरूरत बताई। अधिकारियों ने पहले हुई कुछ सुरक्षा चूकों का भी उल्लेख किया, जिसमें लोगों के एयरपोर्ट के एप्रन एरिया तक पहुंचने की बात सामने आई थी।
सुनवाई में कॉकपिट घटना का क्यों हुआ जिक्र?
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्ण राव ने हाल की फ्लाईदुबई कॉकपिट घटना का उल्लेख किया। इस संदर्भ में अदालत के सामने यह बात रखी गई कि विमानन सुरक्षा से जुड़े खतरे केवल किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं।
कॉकपिट जैसी संवेदनशील जगहों की सुरक्षा को लेकर सामने आई घटना का उदाहरण देते हुए सुरक्षा के व्यापक पहलू पर चर्चा हुई। हालांकि, अदालत ने इस सुनवाई में मस्जिद में नमाज की अनुमति को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया और न ही फिलहाल कोई अंतरिम राहत प्रदान की।
सरकार ने भी रखा अपना पक्ष
सरकार की ओर से भी एयरपोर्ट की मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को लेकर चिंता जताई गई। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने कहा कि समय के साथ सुरक्षा संबंधी खतरे बदले हैं। उन्होंने 1993 के बाद की परिस्थितियों का हवाला देते हुए वर्तमान दौर में संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात रखी।
सरकार की ओर से 2025 में लाल किले के पास हुए हमले का भी संदर्भ दिया गया। दलील यह रही कि मौजूदा सुरक्षा माहौल में एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर संभावित जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फिलहाल हाई कोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी, जहां नमाज की अनुमति और एयरपोर्ट सुरक्षा से जुड़े पक्षों पर आगे सुनवाई की जाएगी।

