नई दिल्ली: भारत और पनामा के संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए पनामा के विदेश मंत्री जेवियर मार्टिनेज-आचा वास्केज ने भारत को “पहले से ही एक सुपरपावर” बताया है। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की वकालत करते हुए कहा कि पनामा भारत के लिए लैटिन अमेरिका और मध्य अमेरिका तक पहुंच का प्रमुख प्रवेश द्वार बन सकता है।
नई दिल्ली में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान वास्केज ने कहा कि ऐसे समय में भारत का दौरा करना उनके लिए सम्मान की बात है, जब भारत वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में लगातार अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच छह दशक पुरानी मित्रता को अब दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी में बदलने का समय आ गया है।
भारत को बताया वैश्विक शक्ति
अपने संबोधन में वास्केज ने कहा कि दुनिया के कई विशेषज्ञ भारत को “उभरती हुई महाशक्ति” बताते हैं, लेकिन पनामा के लिए भारत पहले से ही एक वैश्विक सुपरपावर है। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि एक ऐसी सभ्यतागत शक्ति है जिसकी वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली भूमिका लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने जिस तेजी से आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक प्रगति की है, उसने कई देशों को प्रेरित किया है। पनामा भी भारत के विकास मॉडल से सीख लेकर अपने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाना चाहता है।
रणनीतिक साझेदारी पर जोर
पनामा के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल पारंपरिक मित्रता को मजबूत करना नहीं, बल्कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच साझा मूल्य और विकास की समान सोच इस रिश्ते को और मजबूत बना सकती है।
उन्होंने कहा कि भारत और पनामा के बीच सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे तकनीक, नवाचार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों तक भी विस्तार दिया जाना चाहिए।
पनामा बन सकता है भारत का व्यापारिक केंद्र
वास्केज ने पनामा की भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका देश आकार में भले छोटा हो, लेकिन वैश्विक व्यापार में उसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पनामा नहर पूरी दुनिया के समुद्री व्यापार की सबसे अहम कड़ियों में से एक है और यही पनामा की सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने भारत से अपील की कि वह पनामा को अपनी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाए। उनके अनुसार, पनामा के जरिए भारतीय कंपनियां आसानी से लैटिन अमेरिका और मध्य अमेरिका के बड़े बाजारों तक पहुंच बना सकती हैं।
कई क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं
बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। इनमें फार्मास्यूटिकल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, डिजिटल टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स, समुद्री व्यापार और निवेश प्रमुख रहे।
वास्केज ने कहा कि भारत की तकनीकी क्षमता और पनामा की वैश्विक व्यापारिक स्थिति मिलकर दोनों देशों के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा कर सकती है। उन्होंने भारतीय कंपनियों को पनामा में निवेश करने और वहां से पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में अपने कारोबार का विस्तार करने का भी आमंत्रण दिया।
रिश्तों को नई दिशा देने का संकेत
भारत और पनामा के बीच बढ़ता सहयोग दोनों देशों की विदेश नीति और आर्थिक रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलती है, तो दोनों देशों के संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हो सकते हैं।
पनामा के विदेश मंत्री के इस बयान को भारत की वैश्विक बढ़ती प्रतिष्ठा की एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही यह संकेत भी माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में भारत और पनामा के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी नए आयाम हासिल कर सकती है।

