मुंबई: सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में पूरे दिन उतार-चढ़ाव का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार में खरीदारी देखने को मिली, लेकिन बाद में बैंकिंग और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली का दबाव बढ़ने से बाजार की बढ़त टिक नहीं सकी। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 69.86 अंक की गिरावट के साथ 76,765.92 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 10.60 अंक फिसलकर 23,985.35 के स्तर पर बंद हुआ। हालांकि बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई, लेकिन निवेशकों ने पूरे दिन सतर्क रुख अपनाए रखा।
कारोबार के दौरान बाजार में कई बार तेजी और गिरावट का दौर देखने को मिला। अंत में दोनों प्रमुख सूचकांक लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए। बाजार की चौड़ाई भी कमजोर रही। बीएसई पर 1,539 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,543 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, 155 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
IT सेक्टर बना बाजार का सबसे बड़ा सहारा
मंगलवार के कारोबार में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया और बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभाई। निफ्टी IT इंडेक्स करीब 3.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
आईटी कंपनियों में टीसीएस के शेयर करीब 4.46 प्रतिशत चढ़े। इसके अलावा टेक महिंद्रा, नेस्ले इंडिया, सिप्ला और अन्य चुनिंदा शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। आईटी सेक्टर में आई मजबूती ने बाजार में गिरावट को सीमित रखने में मदद की।
इसके साथ ही रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और फार्मा सेक्टर के कई शेयरों में भी निवेशकों ने खरीदारी की।
बैंकिंग और FMCG सेक्टर ने बढ़ाया दबाव
दूसरी ओर, बैंकिंग और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली का माहौल देखने को मिला। खासतौर पर हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) के तिमाही नतीजों के बाद उसके शेयर में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे पूरे एफएमसीजी सेक्टर पर दबाव बढ़ गया।
गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, कोल इंडिया, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और एनटीपीसी भी शामिल रहे।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी एनर्जी इंडेक्स 1.7 प्रतिशत कमजोर रहा। इसके अलावा एफएमसीजी, पीएसयू बैंक, मेटल, बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर भी लाल निशान में बंद हुए।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का मिला-जुला प्रदर्शन
बड़े शेयरों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों का प्रदर्शन मिश्रित रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में करीब 0.1 प्रतिशत की हल्की बढ़त दर्ज की गई, जबकि स्मॉलकैप 100 इंडेक्स लगभग 0.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में ही खरीदारी की, जबकि व्यापक बाजार में सतर्कता बनी रही।
रुपये में भी रही स्थिरता
विदेशी मुद्रा बाजार में भी ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.86 पर बंद हुआ, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.89 के स्तर पर बंद हुआ था। रुपये में मामूली मजबूती देखने को मिली, लेकिन बाजार पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार तिमाही नतीजों, वैश्विक आर्थिक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। आईटी सेक्टर में मजबूती सकारात्मक संकेत दे रही है, लेकिन बैंकिंग, एफएमसीजी और एनर्जी सेक्टर में दबाव अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है।
ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय कंपनियों के वित्तीय नतीजों, वैश्विक बाजारों के रुझान और आर्थिक आंकड़ों पर नजर रखते हुए निवेश की रणनीति बनानी चाहिए। मौजूदा परिस्थितियों में सतर्क निवेश और मजबूत बुनियादी कंपनियों पर फोकस करना लंबी अवधि के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

