14 May 2026, Thu

सिर्फ 34 एपिसोड वाला 41 साल पुराना TV सीरियल, अजब-गजब थे किरदार, पेट पकड़कर हंसते थे लोग, IMDb पर है 8.6 रेटिंग

दूरदर्शन का गोल्डन दौर: ‘इधर-उधर’ ने कॉमेडी को दी नई पहचान, आज भी दर्शकों की पसंद

भारतीय टेलीविजन के इतिहास में 1980 का दशक वह समय माना जाता है जब मनोरंजन का मतलब सादगी, मजबूत लेखन और परिवार के साथ बैठकर देखने वाला कंटेंट हुआ करता था। इसी सुनहरे दौर में 1985 में एक ऐसा धारावाहिक आया जिसने कॉमेडी की परिभाषा ही बदल दी। यह शो था Idhar Udhar, जिसे आज भी दूरदर्शन के सबसे प्रतिष्ठित और यादगार कॉमेडी शो में गिना जाता है।

इस शो की सबसे खास बात इसकी सरल लेकिन बेहद प्रभावशाली कहानी थी। कुल 34 एपिसोड वाले इस धारावाहिक ने साबित किया कि गुणवत्ता के लिए लंबा सीजन जरूरी नहीं होता, बल्कि मजबूत लेखन और सटीक प्रस्तुति ही दर्शकों को जोड़कर रखती है। IMDb पर इसकी 8.6 की रेटिंग आज भी इसे क्लासिक दर्जा दिलाती है।

दो बहनों की अनोखी जुगलबंदी

‘इधर-उधर’ की जान इसकी मुख्य कलाकार थीं—असल जीवन की सगी बहनें Ratna Pathak Shah और Supriya Pathak। शो में रत्ना पाठक ने ‘सुनीता’ और सुप्रिया पाठक ने ‘पूनम’ का किरदार निभाया। दोनों की केमिस्ट्री इतनी स्वाभाविक और सहज थी कि दर्शक हर सीन में खुद को कहानी का हिस्सा महसूस करते थे।

इन दोनों कलाकारों के साथ Ravi Baswani ने भी अपनी कॉमिक टाइमिंग से शो में जान डाल दी थी। उनके किरदार ने शो को और भी मनोरंजक बना दिया।

कहानी: मुंबई की जिंदगी का मजेदार चित्रण

‘इधर-उधर’ की कहानी मुंबई में रहने वाली दो कामकाजी महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती हैं। सुनीता एक एयर होस्टेस होती है, जबकि पूनम एक विज्ञापन एजेंसी में काम करती है।

दोनों एक किराए के फ्लैट में साथ रहती हैं और उनकी जिंदगी में तब नया मोड़ आता है जब उनके साथ एक ब्रोकर भी घर शेयर करने लगता है। इसके बाद शुरू होती है रोजमर्रा की छोटी-छोटी परेशानियों और मजेदार घटनाओं की कहानी, जिसे बेहद हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाया गया है।

कॉमेडी का नया अंदाज

इस शो की सबसे बड़ी ताकत इसकी लेखन शैली थी। इसमें न तो ओवरड्रामैटिक सीन थे और न ही कृत्रिम कॉमेडी। हर एपिसोड में आम जिंदगी की समस्याओं को हास्य के साथ इस तरह पेश किया गया कि दर्शक खुद को उससे जोड़ पाते थे।

आज के समय में जहां कॉमेडी शोज अक्सर तेज़ और शोर-शराबे वाले अंदाज में बनाए जाते हैं, वहीं ‘इधर-उधर’ एक उदाहरण है कि सादगी भी उतनी ही प्रभावी हो सकती है।

आज भी क्यों है लोकप्रिय

चार दशक से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी यह शो आज के दर्शकों के बीच लोकप्रिय है। इसकी रेटिंग और फैन फॉलोइंग इस बात का सबूत है कि अच्छा कंटेंट कभी पुराना नहीं होता। यह शो आज भी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और यूट्यूब पर उपलब्ध है, जहां नई पीढ़ी भी इसे देखकर उस दौर की सादगी और हास्य को समझ सकती है।

निर्देशक आनंद महेंद्रू के निर्देशन में बना यह धारावाहिक भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जाता है, जिसने यह साबित किया कि मजबूत कहानी और बेहतरीन अभिनय ही किसी शो को अमर बना सकते हैं।

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