नई दिल्ली: राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा गड़बड़ी के मुद्दे को लेकर संसद परिसर में साधु के भेष में विरोध प्रदर्शन करने के बाद सांसद पप्पू यादव के खिलाफ दिल्ली के जहांगीरपुरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता सूर्य मैथिल ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया गया, जिससे सनातन समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने मामले में तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
यह प्रदर्शन संसद के बाहर उस समय हुआ जब विपक्षी दलों के कुछ सांसद भी विरोध में शामिल थे। पप्पू यादव साधु के वेश में नजर आए और उन्होंने राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा मामले को लेकर केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों पर सवाल उठाए। प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक बहस तेज हो गई।
शिकायतकर्ता सूर्य मैथिल का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान भगवा वस्त्रों और धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया गया। उन्होंने दावा किया कि भगवान राम लल्ला से संबंधित एक तस्वीर का अनुचित तरीके से उपयोग किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मैथिल ने अपनी शिकायत में कहा कि संसद परिसर के बाहर हुआ यह प्रदर्शन केवल राजनीतिक विरोध नहीं था, बल्कि इससे धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुंची। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन को INDIA गठबंधन के कुछ अन्य नेताओं और सांसदों का समर्थन प्राप्त था।
शिकायतकर्ता ने गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली पुलिस आयुक्त, संबंधित डीसीपी, एसीपी और जहांगीरपुरी थाने के एसएचओ को संबोधित करते हुए मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल दिल्ली पुलिस की ओर से इस शिकायत पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है या मामले की प्रारंभिक जांच की जा रही है।
इस बीच पप्पू यादव की ओर से भी इस शिकायत को लेकर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनका विरोध प्रदर्शन राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा मामले को लेकर था, जिसे लेकर विपक्ष सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाब मांग रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक विवाद का विषय बन सकता है। एक ओर विपक्ष इसे राजनीतिक विरोध का अधिकार बता सकता है, वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता और कुछ धार्मिक संगठनों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए।
अब यह मामला पुलिस जांच और संभावित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। यदि पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों को गंभीर मानती है, तो संबंधित धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन की मर्यादा, धार्मिक प्रतीकों के उपयोग और राजनीतिक अभिव्यक्ति की सीमाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

