भारतीय क्रिकेट टीम का श्रीलंका दौरा शुरू हो चुका है और शुभमन गिल की कप्तानी में टीम ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले सबसे ज्यादा चर्चा उन खिलाड़ियों की हो रही है जिन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह मिल सकती है। इनमें साई सुदर्शन और देवदत्त पडिक्कल दो ऐसे नाम हैं, जिन पर सभी की नजरें टिकी हैं। दोनों बल्लेबाजों को टेस्ट टीम में शामिल किया गया है, लेकिन टीम संयोजन को देखते हुए माना जा रहा है कि अंतिम एकादश में इनमें से किसी एक को ही मौका मिलेगा।
ऐसे में दोनों खिलाड़ियों के टेस्ट रिकॉर्ड पर नजर डालना जरूरी हो जाता है।
साई सुदर्शन को मिला है ज्यादा अनुभव
साई सुदर्शन ने अब तक भारत के लिए 7 टेस्ट मैच खेले हैं। इस दौरान उन्होंने 12 पारियों में 383 रन बनाए हैं। उनके बल्ले से तीन अर्धशतक निकले हैं, हालांकि वह अब तक टेस्ट शतक नहीं लगा सके हैं।
साई का औसत 31.91 का है, जो शुरुआती करियर के लिहाज से संतोषजनक माना जा सकता है। उनका स्ट्राइक रेट 43.32 रहा है, जिससे यह साफ होता है कि वह टेस्ट क्रिकेट की मांग के अनुसार धैर्य के साथ बल्लेबाजी करने की क्षमता रखते हैं। तकनीकी रूप से मजबूत माने जाने वाले साई सुदर्शन ने घरेलू क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित किया है।
देवदत्त पडिक्कल को मिले हैं सीमित मौके
दूसरी ओर देवदत्त पडिक्कल को अब तक भारतीय टेस्ट टीम में ज्यादा अवसर नहीं मिले हैं। उन्होंने केवल 2 टेस्ट मैच खेले हैं और 3 पारियों में 90 रन बनाए हैं। उनके नाम एक अर्धशतक दर्ज है।
पडिक्कल का औसत 30.00 है, जबकि उनका स्ट्राइक रेट 45.68 रहा है। आंकड़ों के लिहाज से उनका प्रदर्शन साई सुदर्शन से बहुत पीछे नहीं है, लेकिन कम मैच खेलने के कारण उनके पास खुद को साबित करने के पर्याप्त मौके नहीं रहे हैं। घरेलू क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड काफी अच्छा रहा है और लंबी पारी खेलने की उनकी क्षमता को चयनकर्ताओं ने ध्यान में रखा है।
प्लेइंग इलेवन में किसका पलड़ा भारी?
अगर अनुभव और हालिया प्रदर्शन को आधार माना जाए तो साई सुदर्शन का पलड़ा थोड़ा भारी नजर आता है। उन्होंने ज्यादा टेस्ट मैच खेले हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को बेहतर तरीके से साबित किया है। वहीं देवदत्त पडिक्कल के पक्ष में यह तर्क है कि उन्हें लगातार मौके नहीं मिले, इसलिए उनके आंकड़ों का मूल्यांकन सीमित नमूने के आधार पर ही किया जा सकता है।
टीम इंडिया के लिए बाएं हाथ के बल्लेबाज के रूप में दोनों खिलाड़ी उपयोगी विकल्प हैं। श्रीलंका की स्पिन-अनुकूल परिस्थितियों में तकनीकी रूप से सक्षम बल्लेबाज की जरूरत होगी, ऐसे में टीम प्रबंधन का फैसला काफी महत्वपूर्ण रहेगा।
प्रैक्टिस मैच से मिल सकता है संकेत
भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला 15 अगस्त से खेला जाएगा। इससे पहले भारतीय टीम 7 से 9 अगस्त तक तीन दिवसीय प्रैक्टिस मैच खेलेगी। पहले यह मुकाबला चार दिन का निर्धारित था, लेकिन बाद में इसे तीन दिन का कर दिया गया।
संभावना है कि इसी अभ्यास मैच के प्रदर्शन के आधार पर टीम प्रबंधन पहले टेस्ट की प्लेइंग इलेवन को अंतिम रूप देगा। यदि साई सुदर्शन और देवदत्त पडिक्कल दोनों को बल्लेबाजी का मौका मिलता है, तो यह मुकाबला उनके लिए खुद को साबित करने का बड़ा अवसर होगा।
फिलहाल क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बात पर टिकी है कि कप्तान शुभमन गिल और टीम मैनेजमेंट पहले टेस्ट में किस युवा बल्लेबाज पर भरोसा जताते हैं।

