5 May 2026, Tue

रिकवरी के बावजूद शेयर बाजार टूटा, सेंसेक्स 252 अंक लुढ़ककर बंद, निफ्टी भी 24,100 से फिसला

घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिला, जहां एक तरफ प्रमुख इंडेक्स दबाव में रहे तो दूसरी तरफ मिड और स्मॉलकैप शेयरों में हल्की रिकवरी ने बाजार को कुछ सहारा दिया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 0.20 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ, जिससे निवेशकों के बीच थोड़ी राहत का माहौल बना।

हालांकि, मुख्य बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 251.61 अंकों की गिरावट के साथ 77,017.79 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 86.50 अंकों की कमजोरी दर्ज की गई और यह 24,032.80 पर आकर बंद हुआ। कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स एक समय करीब 750 अंकों तक टूट गया था, लेकिन बाद में बाजार में तेज रिकवरी देखने को मिली।

दिनभर के कारोबार में लगभग 1,890 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि 2,110 शेयरों में गिरावट देखने को मिली। वहीं 169 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे साफ है कि बाजार में बिकवाली का दबाव अधिक रहा, लेकिन चुनिंदा सेक्टर्स में खरीदारी ने नुकसान को कुछ हद तक सीमित किया।

बाजार पर दबाव की मुख्य वजहें वैश्विक और घरेलू दोनों स्तर पर रही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और हमलों की खबरों ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा कर दी है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल भी एक बड़ा कारण रहा। ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव बढ़कर लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिससे तेल आयात पर निर्भर देशों की चिंता बढ़ गई है। भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ा सकती है।

वहीं, विदेशी मुद्रा बाजार में भी रुपये पर दबाव देखा गया। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 95.43 पर पहुंच गया, जिसमें दिनभर में करीब 20 पैसे की गिरावट दर्ज की गई। रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

कुल मिलाकर, मिड और स्मॉलकैप शेयरों में हल्की खरीदारी के बावजूद, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और रुपये की कमजोरी ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बनाए रखा। निवेशक फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम और आगामी आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए हुए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *