यूपीआई ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चा को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ओर से केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोपों के बाद केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने पलटवार किया है। उन्होंने दावा किया कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर किसी तरह का शुल्क लगाने का सरकार का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है।
रामदास आठवले ने कहा कि सरकार ने अभी तक ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है, जिसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल सरकार के सामने यूपीआई ट्रांजैक्शन पर किसी शुल्क को शुरू करने या मौजूदा शुल्क में बढ़ोतरी करने से जुड़ा कोई मामला विचाराधीन नहीं है।
व्यापारियों पर नहीं बढ़ाया जाएगा बोझ
आठवले ने कहा कि केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में कारोबार को आसान बनाना शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार व्यापारियों और कारोबारियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने के पक्ष में नहीं है। उनके मुताबिक, सरकार की नीतियों का उद्देश्य कारोबार को बढ़ावा देना और लोगों के लिए डिजिटल भुगतान को सुविधाजनक बनाए रखना है।
मंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में अगर किसी विषय पर सरकार को फैसला लेना होगा तो वह परिस्थितियों और जनहित को ध्यान में रखकर ही निर्णय करेगी। हालांकि, मौजूदा स्थिति में यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का कोई फैसला नहीं हुआ है।
विदेशी दबाव के आरोप पर भी जवाब
रामदास आठवले ने सरकार पर विदेशी ताकतों के दबाव में नीतिगत फैसले लेने के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपनी नीतियां देश के हितों को ध्यान में रखते हुए तय करती है और किसी बाहरी दबाव में काम नहीं करती।
उन्होंने भारत के विभिन्न देशों के साथ संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार सभी प्रमुख देशों के साथ संतुलित और बेहतर संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार भारत के अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार किसी दबाव में आकर अपने फैसले लेती है।
राहुल गांधी ने लगाए थे गंभीर आरोप
दरअसल, राहुल गांधी ने यूपीआई शुल्क को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि बड़े मूल्य वाले डिजिटल ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, इस तरह का कोई भी फैसला छोटे व्यापारियों और आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकता है।
इन आरोपों के बाद सरकार की ओर से सफाई सामने आई है। रामदास आठवले ने दोहराया कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को तथ्यहीन बताया और कहा कि इस मुद्दे पर लोगों के बीच भ्रम फैलाने की जरूरत नहीं है।
फिलहाल यूपीआई शुल्क को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक नीति या नया फैसला सामने आता है या नहीं, इस पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।

