वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते के साथ दोनों देशों के बीच पिछले कई महीनों से जारी टकराव के खत्म होने का दावा किया जा रहा है। समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, इस समझौते की प्रतियां ईरान और मध्यस्थता में शामिल देशों को भेज दी गई हैं। इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद बुधवार को दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने औपचारिक रूप से इस पर अपनी मंजूरी दी।
फ्रांस के वर्साय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन भी मौजूद रहे। हस्ताक्षर के बाद ट्रंप और पेज़ेशकियन ने हाथ मिलाकर समझौते का स्वागत किया, जबकि कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर इस ऐतिहासिक पल का अभिनंदन किया।
समझौते के तहत ईरान की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश का रास्ता खुलने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी देशों के माध्यम से ईरान को लगभग 300 अरब डॉलर का निजी निवेश प्राप्त हो सकता है। इसमें से करीब 150 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता पहले ही जताई जा चुकी है। साथ ही, ईरान की पहले से जब्त वित्तीय संपत्तियों में से लगभग 150 अरब डॉलर की राशि भी चरणबद्ध तरीके से उसे वापस मिलने की संभावना है।
ऊर्जा क्षेत्र में भी ईरान को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। समझौते के तहत ईरान को तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्यात में छूट दी जाएगी, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को नया बल मिल सकता है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य में अगले 30 दिनों के भीतर समुद्री यातायात को सामान्य बनाने का लक्ष्य तय किया गया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार को भी फायदा पहुंच सकता है।
सुरक्षा और सामरिक मामलों को लेकर भी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी है। अमेरिका ने ईरान के आसपास तैनात अपनी सैन्य गतिविधियों को कम करने और सैनिकों को पीछे हटाने की बात कही है। वहीं, ईरान ने परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की गारंटी देने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही उसके परमाणु कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।
दोनों देशों ने अगले 60 दिनों के भीतर एक व्यापक और अंतिम शांति समझौते पर बातचीत जारी रखने का फैसला किया है। प्रस्तावित अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के लिए भी भेजा जाएगा। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है तो इससे न केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों में सुधार होगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक गतिविधियों को भी नया प्रोत्साहन मिल सकता है।

