18 Jun 2026, Thu

डिप्टी स्पीकर के नाम पर खुल्लमखुल्ला ‘तबादला धंधा’! PA को पता चला तो विधानसभा तक मचा हड़कंप; 2 इंजीनियरों पर FIR

भुवनेश्वर। ओडिशा में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। राज्य विधानसभा के डिप्टी स्पीकर भवानी शंकर भोई के नाम और कथित फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर तबादले की सिफारिश किए जाने के आरोप में पुलिस ने एक असिस्टेंट एक्जीक्यूटिव इंजीनियर को गिरफ्तार किया है। मामले के उजागर होने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान लक्ष्मण हेम्ब्रम के रूप में हुई है, जो क्योंझर जिले के हरिचंदनपुर क्षेत्र में असिस्टेंट एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर कार्यरत था। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए भुवनेश्वर लाया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया।

इस मामले में एक अन्य सरकारी कर्मचारी मोनालिसा बेहरा का नाम भी सामने आया है। वह क्योंझर जिले के बांसपाल ब्लॉक में जूनियर इंजीनियर के रूप में कार्यरत है। पुलिस के अनुसार, मोनालिसा फिलहाल फरार है और उसकी तलाश में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क और फर्जीवाड़े के पीछे की साजिश का खुलासा हो सकेगा।

मामले का खुलासा तब हुआ जब ओडिशा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर भवानी शंकर भोई के निजी सचिव ने राजधानी स्थित कैपिटल पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि डिप्टी स्पीकर के नाम और पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी आधिकारिक पत्र जारी किए जा रहे हैं। इन पत्रों में सरकारी कर्मचारियों के तबादले की सिफारिश की गई थी, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने डिप्टी स्पीकर के नाम का नकली लेटरहेड तैयार किया था। इतना ही नहीं, उस पर उनके कथित फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए थे ताकि दस्तावेज असली प्रतीत हों। इन फर्जी पत्रों को विभिन्न विभागों में भेजकर कर्मचारियों के तबादलों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

भुवनेश्वर जोन-1 के एसीपी रमेश चंद्र बिसोई ने बताया कि लक्ष्मण हेम्ब्रम के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी को अदालत में पेश किया जा रहा है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में और कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इन पत्रों के जरिए कितने सरकारी कर्मचारियों के तबादले प्रभावित हुए और इस पूरे षड्यंत्र का उद्देश्य क्या था। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल दो लोगों तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की तलाश के साथ-साथ दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी करा रही है। जांच पूरी होने के बाद मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। इस घटना ने सरकारी व्यवस्था में दस्तावेजों की सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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