नई दिल्ली: फेस्टिव सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब एक महीने में चीनी के दाम में लगभग 24 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखने को मिली है और कई जगहों पर खुदरा कीमत 56 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों के बीच लोगों को आशंका है कि आने वाले दिनों में चीनी की उपलब्धता और कम हो सकती है। हालांकि, चीनी उद्योग संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है।
चीनी की सप्लाई को लेकर घबराने की जरूरत नहीं
ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर के मुताबिक, मौजूदा समय में देश में पर्याप्त मात्रा में चीनी का स्टॉक मौजूद है। ऐसे में त्योहारी सीजन के दौरान बढ़ने वाली मांग को पूरा करने में किसी बड़ी परेशानी की आशंका नहीं है। उन्होंने कहा कि बाजार में सप्लाई मजबूत बनी हुई है और आने वाले समय में उपलब्धता और बेहतर हो सकती है।
उद्योग संगठन का मानना है कि हाल में चीनी की कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें जमाखोरी के साथ-साथ मौसम से जुड़ी परिस्थितियों के कारण उत्पादन प्रभावित होना भी शामिल है। इन वजहों से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
एक महीने में करीब 24 फीसदी बढ़े दाम
चीनी की कीमतों में पिछले एक महीने के दौरान करीब 24 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। कई बाजारों में इसका खुदरा भाव 56 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। फेस्टिव सीजन नजदीक होने के कारण घरेलू खपत बढ़ने की संभावना है। मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ने से उपभोक्ताओं को कीमतों में और तेजी का डर सता रहा है।
हालांकि, ISMA का कहना है कि मौजूदा हालात को चीनी की कमी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। संगठन के मुताबिक घरेलू स्टॉक पर्याप्त है और बाजार की जरूरत के हिसाब से इसकी सप्लाई जारी है।
नई पेराई शुरू होने से बढ़ेगी सप्लाई
चीनी उद्योग को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में नई पेराई शुरू होने के बाद बाजार में सप्लाई और बढ़ेगी। इसके अलावा संभावित आयात से भी घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। घरेलू स्टॉक, आयात और नई पेराई से मिलने वाली चीनी के चलते बाजार में आपूर्ति बेहतर होने की उम्मीद है।
उद्योग संगठन का अनुमान है कि जैसे-जैसे बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी, वैसे-वैसे कीमतों पर बना दबाव भी कम हो सकता है। इससे फेस्टिव सीजन के दौरान उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
जमाखोरी पर भी नजर जरूरी
मौजूदा कीमतों को देखते हुए उद्योग जगत ने अप्रत्यक्ष रूप से जमाखोरी को भी एक अहम वजह बताया है। अगर बाजार में उपलब्ध चीनी को रोककर रखा जाता है, तो कृत्रिम रूप से कमी का माहौल बन सकता है और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में बाजार में नियमित सप्लाई बनाए रखना जरूरी है।
फिलहाल ISMA के बयान से उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। संगठन का कहना है कि देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और आने वाले महीनों में सप्लाई बढ़ने के साथ कीमतों में नरमी आने की संभावना है। हालांकि, खुदरा बाजार में इसका असर कितनी जल्दी दिखाई देता है, यह मांग, सप्लाई और आगामी उत्पादन पर निर्भर करेगा।

