24 Aug 2026, Mon

पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की वाले ‘मक्का पैक्ट’ में ईरान भी होगा शामिल? ईरानी विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब

तेहरान: पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए मक्का रक्षा समझौते को लेकर ईरान की प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान ने साफ किया है कि उसे इस समझौते में शामिल होने के लिए कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं मिला है। हालांकि, तेहरान ने यह जरूर कहा है कि क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर इन देशों के साथ बातचीत के प्रस्ताव दिए गए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।

ईरान की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है, जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सुरक्षा चुनौतियों के बीच मक्का समझौते को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए इस रक्षा समझौते को क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

ईरान को नहीं मिला मक्का समझौते में शामिल होने का न्योता

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि ईरान को मक्का समझौते में शामिल होने का निमंत्रण नहीं मिला है। हालांकि, उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा के लिए संबंधित देशों के सामने प्रस्ताव रखे गए हैं।

ईरान का यह बयान इस बात का संकेत देता है कि वह क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था में अपनी भूमिका को लेकर सक्रिय है, लेकिन फिलहाल मक्का रक्षा समझौते का हिस्सा नहीं है। तेहरान लंबे समय से पश्चिम एशिया में सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र नीति रखता आया है।

7 अगस्त को हुआ था तीन देशों के बीच रक्षा समझौता

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच मक्का रक्षा समझौते पर 7 अगस्त को हस्ताक्षर किए गए थे। मक्का में हुए इस समझौते पर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए।

समझौते का मुख्य उद्देश्य तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना है। इसके तहत तीनों देशों ने यह स्पष्ट किया है कि किसी एक सदस्य देश पर होने वाले सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। हालांकि, समझौते में विस्तृत सैन्य अभियान या तत्काल सैन्य कार्रवाई से जुड़ी कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता सामने नहीं आई है।

बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच समझौता अहम

मक्का समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब पश्चिम एशिया में लगातार तनाव बना हुआ है। क्षेत्र में अलग-अलग देशों और संगठनों के बीच संघर्ष तथा सुरक्षा चुनौतियों ने कई देशों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की का रक्षा सहयोग बढ़ाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ईरान की ओर से बातचीत की पेशकश का जिक्र इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना देता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में तेहरान और इन तीनों देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर किस स्तर पर बातचीत होगी।

हूती हमलों को लेकर भी उठे सवाल

मक्का समझौते को लेकर चर्चा के बीच यमन के हूती विद्रोहियों से जुड़े हमलों का मुद्दा भी सामने आया है। ईरान पर हूती विद्रोहियों का समर्थन करने के आरोप लगते रहे हैं, जबकि तेहरान इन क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर अपनी अलग स्थिति रखता है।

ऐसे में मक्का समझौते की प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर तब, जब पश्चिम एशिया में अलग-अलग मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियां बनी हुई हैं। फिलहाल ईरान ने समझौते में शामिल होने के बजाय क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर बातचीत की पेशकश पर जोर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ईरान और मक्का समझौते में शामिल तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को लेकर कोई औपचारिक संवाद आगे बढ़ता है।

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