सोशल मीडिया पर इन दिनों भारतीय वर्क कल्चर से जुड़ी एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। पोस्ट में एक कर्मचारी ने दावा किया कि उसने अपनी गंभीर रूप से बीमार दादी से मिलने के लिए तीन दिन की छुट्टी मांगी थी, लेकिन मैनेजर का जवाब बेहद असंवेदनशील था। इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भारतीय ऑफिस कल्चर, कर्मचारियों के साथ व्यवहार और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर सवाल उठाए हैं।
भारत में लंबे काम के घंटे, वीकेंड पर ऑफिस कॉल, छुट्टी के दौरान भी उपलब्ध रहने का दबाव और कर्मचारियों से हर समय काम की उम्मीद जैसे मुद्दों पर लंबे समय से बहस होती रही है। कई कर्मचारी शिकायत करते हैं कि निजी या पारिवारिक आपात स्थिति में भी छुट्टी लेना आसान नहीं होता। वायरल पोस्ट ने इस बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।
कर्मचारी ने शेयर की मैनेजर के साथ बातचीत
वायरल पोस्ट को एक्स पर कवि कृष्णन नाम के एक व्यक्ति ने शेयर किया। उन्होंने अपने और मैनेजर के बीच हुई कथित व्हाट्सऐप बातचीत का स्क्रीनशॉट पोस्ट किया। कर्मचारी ने मैनेजर को बताया कि उसकी दादी की हालत गंभीर है और उसे तीन दिन की छुट्टी चाहिए।
कर्मचारी ने अपने संदेश में लिखा कि उसकी दादी गंभीर हालत में हैं, इसलिए वह तीन दिन की छुट्टी लेना चाहता है। पोस्ट के अनुसार, करीब एक घंटे बाद मैनेजर ने जवाब देते हुए कहा, “अचानक तुम पूछ रहे हो।”
कर्मचारी ने इस जवाब के बाद हुई पूरी बातचीत सार्वजनिक नहीं की। हालांकि, उसने पोस्ट के कैप्शन में दावा किया कि कुछ समय बाद उसकी दादी का निधन हो गया। उसने लिखा कि इस घटना से उसे महसूस हुआ कि कई कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की परिस्थितियों को समझने और उनके प्रति सहानुभूति दिखाने की कमी है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने जताया गुस्सा
पोस्ट वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में सोशल मीडिया यूजर्स ने मैनेजर के कथित व्यवहार की आलोचना की। कई लोगों ने कर्मचारी के प्रति संवेदना जताई और कहा कि पारिवारिक आपात स्थिति में छुट्टी मांगना किसी कर्मचारी का सामान्य अधिकार होना चाहिए।
एक यूजर ने अपनी आपबीती साझा करते हुए दावा किया कि चाचा के निधन पर छुट्टी लेने के लिए उसके मैनेजर ने उससे आधिकारिक रिपोर्ट या प्रमाण मांगा था। एक अन्य यूजर ने लिखा कि मृत्यु या आपात स्थिति कभी पहले से सूचना देकर नहीं आती, इसलिए मैनेजर को कर्मचारी की स्थिति समझनी चाहिए थी।
कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि सिर्फ एक मैनेजर के व्यवहार के आधार पर सभी भारतीय कार्यस्थलों को एक जैसा नहीं माना जा सकता। हालांकि, अधिकतर लोगों का मानना था कि कंपनियों को पारिवारिक आपात स्थितियों और शोक के समय कर्मचारियों के लिए स्पष्ट तथा मानवीय छुट्टी नीति बनानी चाहिए।
वर्क-लाइफ बैलेंस पर फिर छिड़ी बहस
वायरल पोस्ट ने कार्यस्थलों पर सहानुभूति और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को भी उजागर किया है। विशेषज्ञ अक्सर मानते हैं कि कर्मचारियों को सम्मान, लचीलापन और भावनात्मक सहयोग देने से उनकी कार्यक्षमता बेहतर होती है।
कई कंपनियां अब हाइब्रिड वर्क मॉडल, मेंटल हेल्थ लीव और कर्मचारी कल्याण से जुड़ी नीतियां अपना रही हैं। इसके बावजूद वायरल पोस्ट जैसी घटनाएं दिखाती हैं कि कार्यस्थल संस्कृति में अभी भी बड़े बदलाव की जरूरत है।

