6 Oct 2026, Tue

बिहार के पूर्णिया से यूरोपीय देश ग्रीस पहुंची मखाने की खेप, घरेलू बाजार की तुलना में मिली ज्यादा कीमत

पूर्णिया, बिहार: बिहार के मखाने की मांग अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बढ़ती दिखाई दे रही है। राज्य के पूर्णिया जिले से मखाने की 1 मीट्रिक टन खेप यूरोपीय देश ग्रीस पहुंची है। इस निर्यात को बिहार के पारंपरिक मखाना उत्पादकों और किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को इस निर्यात की जानकारी साझा की। उनके अनुसार, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से पूर्णिया से ग्रीस के लिए मखाने की खेप भेजी गई थी। इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादकों को विदेशी बाजार उपलब्ध कराना और उनकी आय बढ़ाने के नए अवसर पैदा करना है।

पूर्णिया से ग्रीस भेजा गया मखाना

पूर्णिया जिले के बेलौरी क्षेत्र स्थित एक निर्यातक इकाई से मखाने की यह खेप तैयार की गई थी। इसके बाद इसे दिल्ली स्थित एक निर्यात कंपनी के माध्यम से ग्रीस भेजा गया। मखाने की खेप को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से समुद्री मार्ग के जरिए ग्रीस के पिराएउस पोर्ट तक पहुंचाया गया।

यह निर्यात बिहार के मखाना उत्पादकों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उन्हें घरेलू बाजार के अलावा यूरोपीय बाजार में भी अपने उत्पाद की पहुंच बनाने का अवसर मिल रहा है।

घरेलू बाजार से ज्यादा कीमत मिलने की उम्मीद

इस निर्यात से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मखाने को घरेलू बाजार की तुलना में बेहतर कीमत मिली है। इससे संकेत मिलता है कि विदेशों में भारतीय मखाने की अच्छी बाजार क्षमता मौजूद है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर कीमत मिलने से किसानों और उत्पादकों को अपनी उपज के लिए अधिक मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है। साथ ही, निर्यात बढ़ने पर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और अन्य संबंधित क्षेत्रों में भी रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ सकते हैं।

देश के मखाना उत्पादन में बिहार की बड़ी हिस्सेदारी

भारत दुनिया के प्रमुख मखाना उत्पादक देशों में शामिल है और देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी करीब 80 से 85 प्रतिशत बताई जाती है। राज्य के कई जिलों में बड़े स्तर पर मखाने की खेती की जाती है।

बिहार में करीब 10 जिलों में 35,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मखाने की खेती होने की जानकारी है। पूर्णिया, कटिहार, मधुबनी, दरभंगा और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान इस फसल से जुड़े हुए हैं।

वैश्विक बाजार से जुड़ेंगे स्थानीय उत्पादक

मखाने की विदेशी मांग बढ़ने से बिहार के किसानों और छोटे उत्पादकों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं। निर्यात आधारित कारोबार से उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और प्रोसेसिंग में भी सुधार की संभावना है।

सरकार और संबंधित संस्थाओं की ओर से किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की कोशिशों के बीच ग्रीस को भेजी गई यह खेप बिहार के मखाना उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। आने वाले समय में यदि विदेशी बाजारों में मांग लगातार बढ़ती है, तो इससे बिहार के मखाना किसानों की आय और राज्य के कृषि निर्यात को भी मजबूती मिल सकती है।

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