1 Aug 2026, Sat

प्राइवेट अस्पतालों को ESIC फैसिलिटी बनाने पर विचार कर रही सरकार, जानें किन लोगों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) से जुड़े स्वास्थ्य ढांचे में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि सरकार देश के अच्छे निजी अस्पतालों को भी ESIC सुविधा केंद्र के रूप में नामित करने पर विचार कर रही है। इस कदम का उद्देश्य ESIC से जुड़े करोड़ों बीमित कर्मचारियों और उनके आश्रितों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

दिल्ली में आयोजित फिक्की-एआईओई ग्लोबल इंडस्ट्रियल रिलेशंस समिट को संबोधित करते हुए मांडविया ने कहा कि सरकार ESIC प्रणाली को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाने के लिए सुधारों पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, “अगर निजी क्षेत्र में अच्छे अस्पताल उपलब्ध हैं, तो उन्हें ESIC अस्पताल के रूप में नामित करने की दिशा में विचार किया जा रहा है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस विषय पर उद्योग, अस्पतालों और अन्य हितधारकों से मिलने वाले सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

ESIC देशभर में बीमित कर्मचारियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराता है। वर्तमान व्यवस्था में यदि किसी ESIC अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होती, तो मरीज को सूचीबद्ध निजी अस्पताल में रेफर किया जाता है और इलाज का खर्च ESIC वहन करता है। सरकार अब इस व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर विचार कर रही है ताकि मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सके।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का दायरा अब लगभग 101 करोड़ लोगों, यानी देश की 68.8 प्रतिशत आबादी तक पहुंच चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह दायरा और बढ़ेगा तथा अधिक से अधिक श्रमिकों और कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।

सरकार की इस योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य निम्न आय वर्ग के कर्मचारियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। यदि अच्छे निजी अस्पताल ESIC नेटवर्क का हिस्सा बनते हैं, तो कर्मचारियों को विशेषज्ञ डॉक्टरों, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और बेहतर इलाज की सुविधाओं तक आसान पहुंच मिल सकती है। इससे विशेष रूप से उन क्षेत्रों में राहत मिलने की उम्मीद है जहां ESIC अस्पतालों की संख्या सीमित है या विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं।

मनसुख मांडविया ने औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के बीच संतुलन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग जगत, नियोक्ताओं, कामगारों और ट्रेड यूनियनों के बीच बेहतर तालमेल से ही मजबूत औद्योगिक संबंध और रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। उनके अनुसार औद्योगीकरण देश के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है और इससे बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होता है।

रोजगार के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब GDP में हर 1 प्रतिशत वृद्धि के साथ रोजगार में 1.11 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। उन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में किए गए डिजिटल सुधारों का भी जिक्र किया। मांडविया ने बताया कि EPFO में डिजिटल क्लेम प्रोसेस, एकल UAN पर खातों का स्वत: ट्रांसफर और UPI आधारित निकासी जैसे सुधारों पर भी काम चल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निजी अस्पतालों को ESIC नेटवर्क में शामिल किया जाता है, तो इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच और उपचार की गति में सुधार हो सकता है। हालांकि, इस प्रस्ताव के लागू होने से पहले सरकार को अस्पतालों के चयन, भुगतान प्रणाली और सेवा मानकों से जुड़े कई पहलुओं पर स्पष्ट नीति तैयार करनी होगी।

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