2 May 2026, Sat

परिवार को हर साल 12,81,015 करोड़ रुपये भेजते हैं विदेशों में रहने वाले भारतीय, पश्चिम एशिया तनाव का कोई असर नहीं

Reserve Bank of India (RBI) की डिप्टी गवर्नर Poonam Gupta ने हाल ही में कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारत में विदेशों से आने वाले धनप्रेषण (रेमिटेंस) पर किसी बड़े असर की आशंका नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि देश का भुगतान संतुलन (Balance of Payments) अभी भी “संतोषजनक” स्थिति में बना हुआ है।

पूनम गुप्ता के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था में कुछ मजबूत आधारभूत कारक मौजूद हैं, जो इसे बाहरी झटकों से बचाने में मदद करते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा भेजी जाने वाली बड़ी रकम। उन्होंने बताया कि प्रवासी भारतीय हर साल अपने परिवारों को लगभग 135 अरब डॉलर (करीब 12.8 लाख करोड़ रुपये) भेजते हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत सहारा है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रवाह लगातार बढ़ रहा है और कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के दौरान भी इसमें केवल मामूली गिरावट देखी गई थी। यह दर्शाता है कि भारतीय प्रवासी समुदाय आर्थिक रूप से मजबूत है और संकट के समय भी अपने देश से जुड़ा रहता है।

हालांकि पश्चिम एशिया में हाल के महीनों में तनाव बढ़ा है, खासकर Strait of Hormuz के आसपास, लेकिन पूनम गुप्ता ने स्पष्ट किया कि इसका व्यापक असर पूरे क्षेत्र पर नहीं पड़ा है। उनका कहना है कि वर्तमान संघर्ष सीमित भौगोलिक क्षेत्र तक ही केंद्रित है और इससे सभी प्रवासी भारतीयों की आय या रोजगार पर एक साथ असर पड़ने की संभावना कम है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय प्रवासियों का भौगोलिक और पेशेवर वितरण अब पहले की तुलना में काफी विविध हो गया है। पहले जहां पश्चिम एशिया का हिस्सा कुल रेमिटेंस में अधिक था, वहीं अब यह घटकर करीब 40 प्रतिशत रह गया है। आज भारतीय प्रवासी आईटी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, होटल उद्योग और निर्माण जैसे कई अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जिससे किसी एक क्षेत्र में संकट का समग्र धनप्रेषण पर सीमित प्रभाव पड़ता है।

मार्च महीने के आंकड़ों का जिक्र करते हुए पूनम गुप्ता ने कहा कि इस बार रेमिटेंस पहले की तुलना में बेहतर रहा है। उन्होंने इसका कारण यह बताया कि कुछ प्रवासी भारतीय हाल के समय में वापस लौटे हैं और अपने साथ जमा की गई बचत लेकर आए हैं, जिससे कुल आंकड़ों में सुधार देखने को मिला है।

इसके अलावा उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर मौजूदा तनाव के कारण कुछ प्रवासी अस्थायी रूप से भारत लौटते हैं, तो भविष्य में पुनर्निर्माण गतिविधियों के शुरू होने पर उनके लिए रोजगार के अवसर फिर से बढ़ सकते हैं। इससे धनप्रेषण के प्रवाह पर दीर्घकालिक असर नहीं पड़ेगा।

कुल मिलाकर, RBI का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था बाहरी चुनौतियों के बावजूद मजबूत स्थिति में है। स्थिर रेमिटेंस, सेवा निर्यात और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) जैसे कारक देश के भुगतान संतुलन को सहारा दे रहे हैं। ऐसे में वैश्विक तनाव के बीच भी भारत के लिए यह एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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