2 May 2026, Sat

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली शिपिंग में 90% की भारी गिरावट, 130 की तुलना में अब 10 से भी कम जहाजों को ही मिल रहा रास्ता

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक समुद्री व्यापार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी के बाद से यहां जहाजों की आवाजाही में 90 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।

UK Maritime Trade Operations (UKMTO), जो कि रॉयल नेवी के नेतृत्व में समुद्री गतिविधियों पर नजर रखता है, ने 1 मार्च से 27 अप्रैल के बीच 40 से अधिक घटनाओं की पुष्टि की है। इन घटनाओं में व्यापारिक जहाजों पर हमले, क्षति, उत्पीड़न और बाल-बाल बचने जैसी गंभीर स्थितियां शामिल हैं। संस्था के अनुसार, कम से कम 26 मामलों में जहाजों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया।

इस संकट की जड़ Iran, United States और Israel के बीच बढ़ता टकराव है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ी। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की खबर ने पूरे क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।

तनाव के बीच ईरान ने अपने नियंत्रण वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो गई। यह जलमार्ग दुनिया के लगभग 30 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस की सप्लाई के लिए जिम्मेदार है। पहले जहां रोजाना करीब 130 बड़े मालवाहक जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 10 से भी कम रह गई है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खाड़ी क्षेत्र में 850 से 870 के बीच बड़े व्यापारिक जहाज फंसे हुए हैं। ये जहाज संकरे जलमार्ग और सुरक्षा जोखिमों के चलते बाहर निकलने में असमर्थ हैं। UKMTO के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर इसका गहरा असर पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट से तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ेगा। खासकर ऊर्जा पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। साथ ही, समुद्री व्यापार में आई इस रुकावट का असर अन्य वस्तुओं की आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पैदा हुआ यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और शांति प्रयासों की दिशा ही तय करेगी कि यह स्थिति कब और कैसे सामान्य हो पाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *