18 Jun 2026, Thu

न्यायिक अधिकारी का केस नहीं सुन रहा कोई, 4 जज ने मामले से खुद को अलग किया, CJI सूर्यकांत भड़के, वकीलों को भी सुनाया

नई दिल्ली। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक ही मामले की सुनवाई से लगातार चार न्यायाधीशों के खुद को अलग करने (रिक्यूज) पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने या किसी जज पर दबाव बनाकर मामले से अलग करवाने की कोशिशों को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही चेतावनी दी कि ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ गंभीर कार्रवाई की जा सकती है।

यह मामला न्यायिक अधिकारी अमरीश कुमार जैन की याचिका से जुड़ा है, जिन्हें सेवा से हटाए जाने के खिलाफ उन्होंने वर्ष 2022 में अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कई न्यायाधीश खुद को सुनवाई से अलग कर चुके हैं। इनमें तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश शील नागू सहित न्यायमूर्ति लिसा गिल, न्यायमूर्ति अश्वनी मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक सिब्बल के नाम प्रमुख हैं। लगातार न्यायाधीशों के अलग होने के कारण मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही थी।

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर याचिकाकर्ता अमरीश कुमार जैन ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत इसे दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की मांग की। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को स्पष्ट निर्देश दिए कि मामले की सुनवाई के लिए दो न्यायाधीशों की एक डिवीजन बेंच गठित की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह बेंच 13 जुलाई से मामले की नियमित सुनवाई शुरू करे और निर्णय सुरक्षित होने तक लगातार सुनवाई जारी रखे। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि गठित पीठ के न्यायाधीश किसी भी परिस्थिति में खुद को मामले से अलग न करें।

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कुछ वकीलों के रवैये पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कुछ तथाकथित वरिष्ठ वकील न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं और हाईकोर्ट में अनावश्यक विवाद पैदा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी न्यायाधीश पर दबाव बनाकर उसे मामले से अलग होने के लिए मजबूर किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।

यह पहला अवसर नहीं है जब किसी मामले में बड़ी संख्या में न्यायाधीशों ने सुनवाई से खुद को अलग किया हो। इससे पहले भारतीय वन सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के मामलों में भी 16 न्यायाधीश सुनवाई से अलग हो चुके हैं। वहीं, पूर्व सांसद अतीक अहमद से जुड़े एक मामले में भी कई न्यायाधीशों ने सुनवाई करने से इनकार किया था।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार जजों के रिक्यूज होने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है और मामलों के निपटारे में अनावश्यक देरी होती है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त रुख न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब सभी की नजर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में गठित होने वाली नई डिवीजन बेंच पर है, जो इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई आगे बढ़ाएगी। न्यायपालिका से जुड़े जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मामले में जल्द सुनवाई और निर्णय की संभावना बढ़ गई है।

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