30 Jul 2026, Thu

‘निहत्थे कश्मीरियों को खून से नहला दिया’, पाकिस्तान पर भड़के MQM नेता अल्ताफ हुसैन

लंदन: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में प्रदर्शनकारियों पर कथित गोलीबारी और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के संस्थापक और नेता अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की तीखी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे कश्मीरियों पर बल प्रयोग किया गया और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई।

सोशल मीडिया पर आयोजित एक आपात बैठक को संबोधित करते हुए अल्ताफ हुसैन ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई दिनों से लोग शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने के बजाय कठोर कार्रवाई का रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की घटनाएं बेहद दुखद हैं और इससे पाकिस्तान सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठते हैं।

अल्ताफ हुसैन ने अपने संबोधन में कहा, “कश्मीरियों का खून बेरहमी से बहाया जा रहा है। पाकिस्तान ने कश्मीरियों पर अत्याचार की सारी हदें पार कर दी हैं। जो लोग अपने अधिकारों की मांग कर रहे थे, उन्हें गोलियों से जवाब दिया गया।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान सरकार प्रदर्शन की वास्तविक स्थिति को दुनिया के सामने आने से रोकने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, मीडिया कवरेज को सीमित किया गया और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की स्वतंत्र रिपोर्टिंग में बाधाएं डाली गईं।

MQM नेता ने कहा कि पिछले लगभग 79 वर्षों से पाकिस्तान में कश्मीर के मुद्दे पर राजनीति होती रही है, लेकिन जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोग अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, तब उन्हीं के खिलाफ बल प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने इसे बेहद चिंताजनक स्थिति बताया और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध को दबाना उचित नहीं है।

इस बीच, संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने दावा किया है कि 5 जून से 28 जुलाई के बीच प्रदर्शन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान 67 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। पाकिस्तान सरकार की ओर से भी इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

अल्ताफ हुसैन लंबे समय से पाकिस्तान की सत्ता और सैन्य प्रतिष्ठान के आलोचक रहे हैं। वह 1992 में पाकिस्तान छोड़कर लंदन चले गए थे और तब से निर्वासन में रह रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने जान के खतरे और राजनीतिक दमन के कारण देश छोड़ा था। हाल के वर्षों में भी उन्होंने पाकिस्तान की आंतरिक नीतियों और मानवाधिकार संबंधी मुद्दों पर कई बार बयान दिए हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में अल्ताफ हुसैन का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था, जिसमें वह मशहूर शायर अल्लामा इकबाल का लिखा गीत “सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा” गाते हुए नजर आए थे।

PoJK में जारी विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर भी इस घटनाक्रम पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया और वहां की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और चर्चा होने की संभावना है।

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