बिहार में बड़ा प्रशासनिक फैसला: 224 राजस्व कर्मियों का निलंबन रद्द, पूर्व डिप्टी CM विजय सिन्हा का आदेश पलटा गया
बिहार में नई सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के कार्यकाल में जारी किए गए आदेश को पलट दिया है। इसके तहत राज्य के 224 निलंबित राजस्व कर्मियों का निलंबन समाप्त करने का निर्देश जारी किया गया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार लगातार प्रशासनिक कामकाज को पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है।
11 फरवरी से 19 अप्रैल तक निलंबन का मामला
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा सभी जिलाधिकारियों (DM) को पत्र भेजा गया है। इसमें 11 फरवरी से 19 अप्रैल के बीच निलंबित किए गए सभी राजस्व कर्मियों के मामले में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि ये कर्मचारी लंबे समय से हड़ताल पर थे, जिसके कारण कई जिलों में राजस्व कार्य बाधित हो गया था।
हड़ताल से प्रभावित हुआ कामकाज
राजस्व कर्मियों की हड़ताल के चलते जमीन से जुड़े काम, दाखिल-खारिज, और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही थीं। हालात इतने बिगड़ गए थे कि कई अंचलों में आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इसी बीच सरकार ने सख्ती दिखाते हुए बड़ी संख्या में कर्मियों को निलंबित कर दिया था।
मुख्यमंत्री के पास विभाग की जिम्मेदारी
फिलहाल राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का प्रभार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास है। माना जा रहा है कि इसी कारण सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया है ताकि प्रशासनिक कामकाज को सामान्य किया जा सके और लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हो सके।
अभी भी कुछ अधिकारी हड़ताल पर
हालांकि सरकार के इस फैसले के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। जानकारी के मुताबिक, कुछ राजस्व अधिकारी और CO अभी भी हड़ताल पर हैं। 9 मार्च से जारी इस हड़ताल को लेकर विभाग पहले भी कई बार चेतावनी दे चुका है।
45 से अधिक अधिकारी अभी भी निलंबित
सूत्रों के अनुसार, जहां 224 कर्मचारियों का निलंबन समाप्त किया गया है, वहीं अब भी 45 से अधिक राजस्व अधिकारी और CO निलंबित हैं। सरकार इन मामलों की अलग-अलग स्तर पर समीक्षा कर रही है।
नई सरकार का बड़ा संदेश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला नई सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और कर्मचारियों के साथ संवाद की नीति को दर्शाता है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार अब तेजी से लंबित मामलों को निपटाने और व्यवस्था सुधारने की दिशा में कदम उठा रही है।

