नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और आम आदमी पार्टी (AAP) समेत कई विपक्षी दलों ने इस फैसले को छात्रों के आंदोलन और विपक्ष के दबाव का परिणाम बताया। विपक्षी नेताओं ने इसे युवाओं की जीत करार देते हुए सरकार से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से काम करने की अपील की है।
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश की युवा पीढ़ी और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले छात्रों की जीत है। पार्टी का कहना है कि अब केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार को छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना होगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छात्रों से माफी मांगनी चाहिए और विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
इससे पहले कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए देशभर के छात्रों को बधाई दी थी। राहुल गांधी ने कहा था कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले युवाओं ने पूरे देश के सामने एक मजबूत उदाहरण पेश किया है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यह नई पीढ़ी की बड़ी जीत है और सरकार को अब प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक पूरे तंत्र पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे।
अखिलेश यादव ने कहा कि इंटरनेट, सोशल मीडिया और सड़कों पर युवाओं के आंदोलन ने आखिरकार देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी को भी झुकने पर मजबूर कर दिया। उनके अनुसार, यह केवल छात्रों की जीत नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी की भी जीत है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में मिलकर काम करने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष लगातार छात्रों की मांगों का समर्थन कर रहा था और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उसी का हिस्सा थी। अखिलेश यादव के मुताबिक, छात्रों और युवाओं के शांतिपूर्ण आंदोलन ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में जनमत की अहम भूमिका होती है।
वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे सरकारी अहंकार पर लोकतंत्र की जीत बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में केजरीवाल ने देशभर के छात्रों और विशेष रूप से आंदोलन का नेतृत्व करने वाले युवाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण क्षण है और सरकार को इससे सबक लेना चाहिए।
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। इन आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
फिलहाल विपक्षी दलों का कहना है कि यह केवल एक मंत्री के इस्तीफे का मामला नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की शुरुआत होनी चाहिए। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम और नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर टिकी हैं।

