देश में हवाई कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अगले 10 वर्षों में करीब 30,000 करोड़ रुपये की लागत से 100 नए हवाई अड्डे विकसित करने की योजना है। इस पहल का उद्देश्य देश के छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों को बेहतर हवाई संपर्क से जोड़ना और क्षेत्रीय हवाई यात्रा को बढ़ावा देना है।
इसी क्रम में अहमदाबाद एयरपोर्ट पर भारत की तीसरी ‘हब एंड स्पोक’ सर्विस की शुरुआत की गई। इस मॉडल के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले यात्रियों को बड़े एयरपोर्ट के माध्यम से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक आसानी से पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
अहमदाबाद बना तीसरा ‘हब एंड स्पोक’ एयरपोर्ट
अहमदाबाद एयरपोर्ट को देश में ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल से जुड़ने वाला तीसरा एयरपोर्ट बनाया गया है। इससे यात्रियों को छोटे शहरों और क्षेत्रीय एयरपोर्ट से बड़े हब एयरपोर्ट तक पहुंचने के बाद आगे की फ्लाइट लेने में सुविधा होगी।
इस सर्विस की शुरुआत सबसे पहले वाराणसी एयरपोर्ट से हुई थी। इसके बाद जुलाई 2026 में अमृतसर एयरपोर्ट को भी इस मॉडल से जोड़ा गया। अब अहमदाबाद के शामिल होने से इस नेटवर्क का दायरा और बढ़ गया है।
क्या है ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल?
‘हब एंड स्पोक’ एविएशन सेक्टर में इस्तेमाल होने वाला एक ऐसा मॉडल है, जिसमें एक बड़े एयरपोर्ट को मुख्य केंद्र यानी हब बनाया जाता है, जबकि छोटे एयरपोर्ट स्पोक के तौर पर काम करते हैं।
इसे उदाहरण से समझें तो अगर किसी यात्री को अयोध्या से लंदन जाना है, तो वह पहले अयोध्या जैसे क्षेत्रीय एयरपोर्ट से अहमदाबाद पहुंचेगा। इसके बाद अहमदाबाद को हब के रूप में इस्तेमाल करते हुए वह लंदन की कनेक्टिंग फ्लाइट ले सकेगा। इस व्यवस्था से छोटे शहरों के यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।
12 साल में एयरपोर्ट की संख्या 74 से बढ़कर 166
नागर विमानन मंत्रालय के मुताबिक वर्ष 2014 में देश में 74 एयरपोर्ट थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 166 हो गई है। पिछले 12 वर्षों में हवाई ढांचे के विस्तार पर तेजी से काम किया गया है।
इस दौरान नए एयरपोर्ट और टर्मिनल विकसित करने के साथ क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया गया है। सरकार का लक्ष्य अब इस नेटवर्क को देश के और अधिक शहरों तक पहुंचाना है।
10 साल में 100 नए एयरपोर्ट बनाने की योजना
रीजनल एयर कनेक्टिविटी स्कीम के तहत अगले 10 वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट बनाने की योजना है। इस परियोजना पर करीब 30,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य छोटे शहरों को हवाई सेवा से जोड़ने के साथ-साथ देश में विमानन क्षेत्र के बुनियादी ढांचे का विस्तार करना है।
वहीं, संशोधित रीजनल एयर कनेक्टिविटी स्कीम को वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू करने की मंजूरी दी गई है। इसके लिए केंद्र की बजटीय सहायता समेत कुल 28,840 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय हवाई यात्रा को नई गति मिलने की उम्मीद है।

