26 May 2026, Tue

देश की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में, वित्त मंत्री बोलीं- फ्यूल, फर्टिलाइजर, फॉरेन करेंसी पर फोकस करने की जरूरत

केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को देश की अर्थव्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत को तीन प्रमुख क्षेत्रों—फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फॉरेन करेंसी (विदेशी मुद्रा) पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है।

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) के 37वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और विकास की गति को बरकरार रखने के लिए संतुलित नीतिगत कदम उठा रही है। उन्होंने इस दौरान उन लोगों की आलोचना भी की जो देश की आर्थिक स्थिति को लेकर लगातार नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा ईंधन बचत और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर दिए गए संदेशों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की अपील का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है, न कि किसी तरह का भय पैदा करना। उन्होंने कहा कि देश में घबराहट या निराशा फैलाने की कोई आवश्यकता नहीं है और लोगों के बीच विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है।

इस दौरान निर्मला सीतारमण ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कटौती को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईंधन पर करों में कमी के कारण सरकार को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। इसके बावजूद सरकार ने आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही उर्वरकों की कीमतें भी अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच गई हैं। उन्होंने चिंता जताई कि सोने की बढ़ती कीमतें भी देश के बाहरी आर्थिक क्षेत्र पर दबाव बना सकती हैं। ऐसे में ईंधन, उर्वरक और विदेशी मुद्रा भंडार पर लगातार नजर बनाए रखना जरूरी हो गया है।

उन्होंने कहा कि भारत की अधिकांश चुनौतियां बाहरी कारणों से पैदा हुई हैं, जबकि घरेलू अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत और सकारात्मक संकेत दे रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों और निराशावादी सोच से बचें तथा देश की आर्थिक क्षमता पर भरोसा रखें।

अपने संबोधन में वित्त मंत्री ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये के भुगतान विभिन्न संस्थानों और कंपनियों के पास लंबित हैं, जिससे इन उद्यमों की कार्यशील पूंजी और विकास प्रभावित हो रहा है।

सीतारमण ने सरकारी कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से आग्रह किया कि वे एमएसएमई को समय पर भुगतान सुनिश्चित करें। उन्होंने विशेष रूप से 45 दिनों की निर्धारित समय-सीमा का पालन करने पर जोर देते हुए कहा कि भुगतान में देरी छोटे उद्योगों के लिए गंभीर वित्तीय संकट पैदा कर सकती है।

वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है और सरकार हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *