15 Sep 2026, Tue

दिहाड़ी मजदूर करने वाला परिवार, लेकिन बच्चों ने कर दिया कमाल, 5 बच्चे अब डॉक्टर बनने की राह पर

ओडिशा के कंधमाल जिले से संघर्ष, मेहनत और सफलता की ऐसी कहानी सामने आई है, जो मुश्किल परिस्थितियों में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए प्रेरणा बन सकती है। जिले के एक दूरदराज गांव में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर परिवार के चार बच्चों और एक भतीजी ने NEET परीक्षा पास कर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की है। आर्थिक तंगी के बावजूद इन बच्चों ने पढ़ाई का रास्ता नहीं छोड़ा और लगातार मेहनत करते हुए डॉक्टर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया।

दिहाड़ी मजदूरी और खेती से चलता था परिवार

यह परिवार कंधमाल जिले के दरिंगबाड़ी ब्लॉक के एक गांव में रहता है। परिवार की आर्थिक स्थिति लंबे समय से कमजोर रही है। घर का खर्च दिहाड़ी मजदूरी, खेती और जरूरत पड़ने पर उधार लेकर चलाया जाता था। परिवार के मुखिया 73 वर्षीय बुर्सी प्रधान ने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए लंबे समय तक मजदूरी की। उन्होंने अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए केरल में भी दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम किया।

उनकी पत्नी अनुसया प्रधान भी परिवार की जिम्मेदारियों को संभालती रहीं। दोनों ने आर्थिक परेशानियों के बावजूद बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी। कई बार ऐसा भी हुआ कि काम नहीं मिलने पर परिवार को उस दिन की मजदूरी से होने वाली आमदनी से भी वंचित रहना पड़ता था। इसके बावजूद बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकी।

बड़े बेटे से शुरू हुआ डॉक्टर बनने का सफर

परिवार में मेडिकल शिक्षा की शुरुआत बड़े बेटे बिभीषण प्रधान से हुई। उन्होंने वर्ष 2021 में NEET परीक्षा पास की और कोरापुट स्थित श्री लक्ष्मण नायक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में एमबीबीएस में दाखिला हासिल किया।

बड़े भाई की सफलता ने परिवार के दूसरे बच्चों का हौसला बढ़ाया। अगले ही साल उनकी बहन मोनालिसा प्रधान ने भी NEET परीक्षा में सफलता हासिल की और उसी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की। इस तरह परिवार में डॉक्टर बनने का सपना धीरे-धीरे मजबूत होता चला गया।

पढ़ाई के साथ काम भी करती थीं मोनालिसा

मोनालिसा की सफलता के पीछे भी संघर्ष की लंबी कहानी है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने ब्रह्मपुर की एक कपड़े की दुकान में काम किया। पढ़ाई और नौकरी के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों को अपनी मंजिल के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया।

मोनालिसा ने खुद की पढ़ाई के साथ अपने बड़े भाई की मेडिकल शिक्षा में भी मदद की। आर्थिक कठिनाइयों के बीच एक डॉक्टर की ओर से मिली आर्थिक सहायता ने भी उनकी पढ़ाई जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पांच बच्चों की सफलता बनी मिसाल

धीरे-धीरे परिवार के अन्य बच्चों ने भी मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ने का लक्ष्य तय किया। चार बच्चों और एक भतीजी के NEET पास करने और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीट हासिल करने की उपलब्धि ने पूरे परिवार को गौरवान्वित किया है।

यह कहानी बताती है कि आर्थिक संसाधनों की कमी किसी छात्र के सपनों को रोक नहीं सकती, अगर मेहनत, लगन और परिवार का सहयोग साथ हो। जिस परिवार ने कभी दिहाड़ी मजदूरी और उधार के सहारे जीवन चलाया, उसी परिवार के पांच बच्चे अब डॉक्टर बनने की राह पर हैं। उनकी सफलता ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के उन छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है, जो बड़े सपने देखते हैं लेकिन संसाधनों की कमी से परेशान रहते हैं।

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