दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए धमाके की जांच से जुड़ी चार्जशीट में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह विस्फोट सामान्य आईईडी धमाका नहीं बल्कि सुसाइड बॉम्बिंग का मामला था। आरोप है कि डॉक्टर उमर उन नबी खुद विस्फोटक से लदी कार में मौजूद था और उसी ने डिवाइस को सक्रिय किया था। मामले में जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने धमाके की पूरी साजिश को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट
जांच एजेंसी ने इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जांच के दौरान कथित तौर पर सामने आया कि इस साजिश से जुड़े लोग आतंकी संगठनों अंसार गजवात-उल-हिंद और AQIS से जुड़े हुए थे।
जांच में शाहीन सईद के पास से मिले एक पेन ड्राइव से 87 तस्वीरें बरामद होने की बात भी सामने आई है। इनमें कुछ संदिग्ध लोगों की तस्वीरें हथियारों और मैगजीन के साथ होने का दावा किया गया है। जांचकर्ताओं ने इन तस्वीरों और अन्य डिजिटल सबूतों को मामले की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण माना है।
विस्फोट में कार को बनाया गया था हथियार
चार्जशीट के अनुसार, धमाके में इस्तेमाल हुई Hyundai i20 कार को विस्फोटक से लदे वाहन के तौर पर इस्तेमाल किया गया था। तकनीकी भाषा में ऐसे वाहन को Vehicle-Borne Improvised Explosive Device यानी VBIED कहा जाता है।
फॉरेंसिक जांच के दौरान कार के मलबे और घटनास्थल से बरामद सामग्री में TATP, अमोनियम नाइट्रेट और पोटैशियम नाइट्रेट जैसे विस्फोटक पदार्थों के अवशेष मिलने की बात कही गई है। इन साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसी ने धमाके की प्रकृति को लेकर अपनी थ्योरी सामने रखी है।
DNA जांच से उमर की पहचान का दावा
जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा घटनास्थल से मिले जैविक नमूनों से जुड़ा बताया गया है। चार्जशीट के मुताबिक, शरीर के हिस्सों और नाक से लिए गए स्वैब की फोरेंसिक जांच की गई। इन नमूनों में विस्फोटक पदार्थों के अंश मिलने की बात कही गई है।
जांच एजेंसी का दावा है कि DNA प्रोफाइलिंग के जरिए इन जैविक नमूनों की पहचान डॉक्टर उमर उन नबी के रूप में हुई। इसके आधार पर जांचकर्ताओं का निष्कर्ष है कि धमाके के समय उमर उसी कार के अंदर मौजूद था।
धमाके में 11 लोगों की हुई थी मौत
इस विस्फोट में 11 लोगों की जान जाने और 29 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की थी। जांच के दौरान विस्फोटक सामग्री, डिजिटल डिवाइस, तस्वीरों और फॉरेंसिक नमूनों समेत कई सबूत जुटाए गए।
चार्जशीट में दर्ज दावे जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए निष्कर्ष हैं। मामले में अदालत के समक्ष इन आरोपों और सबूतों की कानूनी जांच आगे की प्रक्रिया में होगी। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि जांच एजेंसियां धमाके के पीछे मौजूद नेटवर्क, उसकी तैयारी और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

