दिल्ली सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसने और प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर ट्रेड एंड टैक्सेस (GST) विभाग में व्यापक स्तर पर तबादले किए गए हैं। कुल 162 अधिकारियों और कर्मचारियों को इधर-उधर किया गया है, जिनमें कई ऐसे अधिकारी भी शामिल हैं जो लंबे समय से एक ही पद पर तैनात थे।
सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई पारदर्शिता बढ़ाने और एक ही जगह लंबे समय से जमे कर्मचारियों के कारण होने वाली संभावित अनियमितताओं को रोकने के उद्देश्य से की गई है। हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा किए गए विभागीय निरीक्षण के दौरान कई खामियां और अनियमितताएं सामने आई थीं, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया।
किन अधिकारियों का हुआ ट्रांसफर?
जारी आदेश के अनुसार तीन असिस्टेंट कमिश्नर सहित कुल 162 कर्मचारियों का ट्रांसफर किया गया है। इनमें 58 सेक्शन ऑफिसर ग्रेड-1, 22 असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर ग्रेड-2, 74 सीनियर असिस्टेंट ग्रेड-3 और 5 जूनियर असिस्टेंट ग्रेड-4 शामिल हैं। सरकार का मानना है कि लंबे समय तक एक ही जगह तैनाती से कार्यप्रणाली में ढिलाई और भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ सकती है।
सीएम रेखा गुप्ता का सख्त रुख
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है और जीरो टॉलरेंस नीति को सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने 8 अप्रैल 2026 को जीएसटी विभाग का औचक निरीक्षण किया था, जहां उन्हें कई गंभीर अनियमितताएं देखने को मिलीं। इसके बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए बड़े पैमाने पर तबादलों का आदेश जारी किया गया।
अस्पतालों का भी औचक निरीक्षण
इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने गुरुवार को सिविल लाइंस स्थित अरुणा आसफ अली सरकारी अस्पताल का भी अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल में दवाओं की कमी, गंदगी और अन्य व्यवस्थाओं में खामियां पाई गईं। मुख्यमंत्री ने अस्पताल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई और तुरंत सुधार के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि मरीजों को समय पर दवाएं, स्वच्छ वातावरण, पीने का साफ पानी और बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान ओपीडी, वार्ड, दवा काउंटर, स्वच्छता व्यवस्था और डिजिटल सेवाओं की भी समीक्षा की गई।
सरकार का संदेश
दिल्ली सरकार के इस कदम को प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी ताकि सरकारी सिस्टम में जवाबदेही और ईमानदारी को मजबूत किया जा सके।

