2 Jul 2026, Thu

जॉब छोड़कर वेट्रेस बनते ही महिला की पुरानी बीमारियां हुईं ठीक, Video शेयर कर खुद बताई सच्चाई

सोशल मीडिया पर इन दिनों 33 वर्षीय महिला की कहानी तेजी से वायरल हो रही है। सारामा कॉर्निश नाम की महिला ने दावा किया है कि छह अंकों की सैलरी वाली कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर रेस्तरां में वेट्रेस का काम शुरू करने के बाद उसकी तनाव से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं कम हो गईं। महिला ने अपने अनुभव को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो के माध्यम से साझा किया है, जिस पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

यह वीडियो इंस्टाग्राम अकाउंट ‘गर्ल्स हू डिटैच’ से पोस्ट किया गया है। इसमें सारामा एक रेस्तरां का फर्श साफ करते हुए मुस्कुराती नजर आ रही हैं। वीडियो के टेक्स्ट में उन्होंने बताया कि उन्होंने 33 साल की उम्र में लाखों की सैलरी वाली नौकरी छोड़कर वेट्रेस के रूप में काम करने का फैसला किया।

सारामा का कहना है कि यदि इस बदलाव के कारण उन्हें तनाव से जुड़ी इरिटेबल बाउल सिंड्रोम यानी IBS की गंभीर परेशानी दोबारा नहीं होती, तो वह जीवनभर रेस्तरां का फर्श साफ करने को भी तैयार हैं। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि स्वास्थ्य ही असली धन है।

स्वास्थ्य समस्या की वजह तलाशने में बीते छह महीने

वीडियो के कैप्शन में महिला ने दावा किया कि कॉर्पोरेट नौकरी के अंतिम छह महीने उनके लिए बेहद मुश्किल थे। वह पेट और पाचन से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रही थीं। बीमारी का कारण जानने के लिए उन्होंने गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विशेषज्ञ से कई तरह की जांच भी कराईं।

सारामा के मुताबिक, जांच के बाद उन्हें महसूस हुआ कि उनकी परेशानी की मुख्य वजह कॉर्पोरेट नौकरी से मिलने वाला लगातार तनाव था। उन्होंने दावा किया कि नौकरी छोड़ने के बाद उनके लक्षण धीरे-धीरे गायब हो गए और अब वह पहले के मुकाबले अधिक स्वस्थ महसूस करती हैं। हालांकि, महिला के इन स्वास्थ्य संबंधी दावों की स्वतंत्र चिकित्सा पुष्टि सामने नहीं आई है।

लोगों ने खुशी और स्वास्थ्य को दी प्राथमिकता

वीडियो वायरल होने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सारामा के फैसले का समर्थन किया। एक यूजर ने लिखा कि इंसान को वही काम करना चाहिए, जिसमें वह खुश और स्वस्थ रह सके। पदनाम और सैलरी का कोई महत्व नहीं होता, यदि काम लगातार मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा हो।

एक अन्य महिला ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उसने भी इमरजेंसी डिपार्टमेंट में नर्स की फुल-टाइम नौकरी छोड़ दी थी। अब वह सौंदर्य सेवाओं से जुड़ा काम करती है और पहले से अधिक खुश तथा स्वस्थ महसूस करती है।

कुछ यूजर्स ने उठाए सवाल

सभी लोगों ने सारामा की बात से सहमति नहीं जताई। एक यूजर ने लिखा कि वेट्रेस जैसी कम वेतन वाली और ग्राहकों से सीधे संपर्क वाली नौकरियां भी काफी तनावपूर्ण हो सकती हैं। ऐसे कामों में नौकरी की असुरक्षा, अनिश्चित आय, लंबे घंटे और गलत व्यवहार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

यूजर ने कहा कि हर व्यक्ति के लिए अधिक सैलरी वाली नौकरी छोड़ना संभव नहीं है, खासकर तब जब उस पर परिवार, किराए और दूसरे खर्चों की जिम्मेदारी हो। ऐसे में सारामा की कहानी व्यक्तिगत अनुभव तो हो सकती है, लेकिन इसे तनाव कम करने का आसान समाधान नहीं माना जा सकता।

फिलहाल यह वीडियो काम, पैसा, खुशी और स्वास्थ्य के बीच संतुलन को लेकर सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ रहा है।

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