नई दिल्ली: सोना और चांदी में निवेश की योजना बना रहे लोगों के लिए जून 2026 का महीना बड़ी राहत लेकर आया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर इस महीने कीमती धातुओं की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सोने की कीमत में करीब 15,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है, जबकि चांदी लगभग 45,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई है। इस गिरावट ने नए निवेशकों के लिए खरीदारी का अवसर पैदा किया है, जबकि पहले से निवेश कर चुके लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
MCX के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून 2026 को सोने का भाव 1,54,908 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 25 जून तक गिरकर 1,39,843 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इस तरह सोने में एक महीने के दौरान 15,065 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह, चांदी की कीमत 1 जून को 2,63,458 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो 25 जून तक घटकर 2,18,680 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। यानी चांदी में लगभग 44,778 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट आई है।
क्यों गिर रहे हैं सोने और चांदी के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने सोना और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। बाजार में यह संभावना बढ़ी है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है या फिर बढ़ा सकता है। इसके कारण अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और बॉन्ड यील्ड में भी तेजी आई है।
आमतौर पर जब ब्याज दरें बढ़ती हैं और डॉलर मजबूत होता है, तो निवेशक सोने और चांदी जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों से दूरी बनाने लगते हैं। यही वजह है कि जून के दौरान दोनों कीमती धातुओं में तेज गिरावट देखने को मिली।
क्या अभी खरीदारी का सही समय है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा स्तर आकर्षक हो सकते हैं। यदि आने वाले समय में कीमतों में सुधार होता है, तो मौजूदा स्तर पर खरीदारी करने वाले निवेशकों को अच्छा रिटर्न मिल सकता है। हालांकि, निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करें। इससे कीमतों में और गिरावट आने की स्थिति में औसत खरीद मूल्य को कम किया जा सकता है।
पुराने निवेशकों को क्या करना चाहिए?
जिन निवेशकों ने पहले से सोना या चांदी खरीद रखी है, उन्हें घबराकर अपने निवेश को बेचने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ब्याज दरों से जुड़ी हुई है। यदि निवेशकों की निवेश अवधि लंबी है, तो वे अपने पोर्टफोलियो को बनाए रख सकते हैं। अतिरिक्त निवेश क्षमता होने पर धीरे-धीरे निवेश बढ़ाकर औसत लागत को कम किया जा सकता है।
फिलहाल, बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीतियों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर बनी हुई है। इन कारकों के आधार पर आने वाले दिनों में सोना और चांदी की कीमतों की दिशा तय होगी।
