बर्लिन: वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग से एक बड़ी खबर सामने आई है। जर्मनी की दिग्गज कार निर्माता कंपनी Volkswagen अपने कारोबार में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी आने वाले वर्षों में दुनिया भर में करीब 1 लाख कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है। इसके अलावा कई फैक्ट्रियों को बंद करने और पूरे बिजनेस मॉडल में व्यापक बदलाव करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। यदि यह योजना लागू होती है, तो यह फॉक्सवैगन के इतिहास की सबसे बड़ी लागत कटौती और पुनर्गठन प्रक्रिया मानी जाएगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) Oliver Blume फॉक्सवैगन को अधिक प्रतिस्पर्धी और लाभदायक बनाने के लिए बड़े पैमाने पर बदलाव करना चाहते हैं। हाल के वर्षों में कंपनी को कई आर्थिक और व्यावसायिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते यह कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
क्यों उठाना पड़ रहा है इतना बड़ा कदम?
विशेषज्ञों के मुताबिक, फॉक्सवैगन पर कई मोर्चों से दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, चीन में मांग में कमी और इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने कंपनी के मुनाफे को प्रभावित किया है। खासतौर पर चीनी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियां, जैसे BYD, वैश्विक बाजार में तेजी से अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं, जिससे फॉक्सवैगन जैसी पारंपरिक कंपनियों पर दबाव बढ़ा है।
इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से बढ़ते बदलाव के कारण भी कंपनी को भारी निवेश करना पड़ रहा है। इसी वजह से फॉक्सवैगन अपने परिचालन खर्चों में बड़ी कटौती करने और कारोबारी ढांचे को नया स्वरूप देने की योजना बना रही है।
1 लाख कर्मचारियों पर गिर सकती है गाज
रिपोर्ट्स के अनुसार, फॉक्सवैगन पहले से घोषित कर्मचारियों की कटौती योजना को और बढ़ाकर करीब 1 लाख तक ले जा सकती है। वर्तमान में कंपनी के वैश्विक स्तर पर लगभग 6.57 लाख कर्मचारी हैं। इससे पहले कंपनी वर्ष 2030 तक करीब 50,000 नौकरियां कम करने की योजना पर काम कर रही थी। हालांकि, अब यह संख्या दोगुनी हो सकती है।
बताया जा रहा है कि अब तक लगभग 28,000 कर्मचारी स्वैच्छिक रूप से कंपनी छोड़ने पर सहमत हो चुके हैं। कंपनी पहले ही जर्मनी में बड़े पैमाने पर लागत कटौती कार्यक्रम चला रही है।
कई फैक्ट्रियां भी हो सकती हैं बंद
खर्चों को कम करने के लिए फॉक्सवैगन जर्मनी की चार प्रमुख फैक्ट्रियों को बंद करने पर विचार कर रही है। इनमें Audi की नेकार्सुल्म फैक्ट्री के अलावा हैनोवर, ज़्विकाऊ और एम्डेन स्थित संयंत्र शामिल बताए जा रहे हैं। कंपनी कुछ कंपोनेंट प्लांट्स को अलग करने और मुख्य ब्रांड संरचना में भी बदलाव पर विचार कर रही है, ताकि परिचालन को अधिक सरल और लाभदायक बनाया जा सके।
11 अरब यूरो खर्च घटाने का लक्ष्य
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फॉक्सवैगन इस दशक के अंत तक अपने प्रशासनिक और परिचालन खर्चों में करीब 11 अरब यूरो की कटौती करना चाहती है। कंपनी पहले ही अपनी वार्षिक उत्पादन क्षमता को लगभग 1.2 करोड़ वाहनों से घटाकर करीब 90 लाख वाहन करने की दिशा में कदम उठा चुकी है।
हालांकि, फॉक्सवैगन ने इन रिपोर्ट्स पर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है। कंपनी का कहना है कि इस तरह के महत्वपूर्ण फैसलों पर संबंधित बोर्ड और प्रबंधन स्तर पर चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

