श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अगस्त महीने के दौरान पीक आवर्स में बिजली की कमी की आशंका जताई गई है। नॉर्दर्न रीजनल पावर कमिटी (NRPC) की हालिया बैठक में पेश किए गए अनुमानों के अनुसार, इस अवधि में दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 13.9 प्रतिशत बिजली की कमी हो सकती है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सामान्य घंटों में बिजली की उपलब्धता पर्याप्त रहेगी और कुल मिलाकर राज्य में बिजली संकट जैसी स्थिति नहीं है।
कमिटी के अनुसार, अगस्त 2026 में पीक आवर्स के दौरान कुल 2710 मेगावाट बिजली की मांग रहने का अनुमान है, जबकि उपलब्धता 2334 मेगावाट रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि लगभग 376 मेगावाट बिजली की कमी हो सकती है, जिससे खासकर शाम और रात के व्यस्त समय में कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
सामान्य घंटों में 47% अतिरिक्त बिजली उपलब्ध
अधिकारियों ने बताया कि पीक आवर्स को छोड़कर बाकी समय में बिजली की स्थिति काफी बेहतर रहेगी। अनुमान है कि सामान्य दिनों और सामान्य घंटों में जरूरत से करीब 47 प्रतिशत अधिक बिजली उपलब्ध रहेगी। यानी कुल बिजली उत्पादन और आपूर्ति पर्याप्त है, लेकिन मांग के चरम समय में अस्थायी दबाव की स्थिति बन सकती है।
बिजली विभाग का कहना है कि मांग और आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए विभिन्न स्तरों पर समन्वय किया जा रहा है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त स्रोतों से बिजली की व्यवस्था भी की जा सकती है।
बड़ी आबादी पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पीक आवर्स के दौरान अनुमानित कमी बनी रहती है, तो इसका असर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अधिक महसूस किया जा सकता है। घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा छोटे उद्योग, व्यापारिक प्रतिष्ठान और आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि बिजली कटौती को न्यूनतम रखने और आपूर्ति प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए पहले से तैयारी की जा रही है।
बिजली बिल का बढ़ता बकाया भी चिंता का विषय
जम्मू-कश्मीर में बिजली वितरण व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती सरकारी संस्थानों पर बढ़ता बकाया भी है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अप्रैल में विधानसभा में जानकारी दी थी कि सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर 3,747 करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल बकाया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुल बकाया 3,74,735.42 लाख रुपये है। इसमें कश्मीर पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (KPDCL) के अंतर्गत 2,31,022.41 लाख रुपये और जम्मू पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (JPDCL) के अंतर्गत 1,43,713.01 लाख रुपये शामिल हैं।
पीएचई विभाग पर सबसे ज्यादा बकाया
बिजली विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (PHE) विभाग पर सबसे अधिक बिजली बिल बकाया है। इसके अलावा कई अन्य सरकारी विभाग और एजेंसियां भी लंबे समय से भुगतान नहीं कर रही हैं, जिससे वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा है।
फिलहाल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, क्योंकि राज्य में कुल बिजली की उपलब्धता पर्याप्त है। हालांकि, भारी मांग वाले समय में कुछ इलाकों में अस्थायी बिजली संकट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

