प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर मतदान से पहले लोकसभा सांसदों से भावनात्मक अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी सांसद अपने घर की मां, बहन, बेटी और पत्नी का स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें और देश की नारी शक्ति को सशक्त बनाने के इस ऐतिहासिक अवसर का समर्थन करें।
लोकसभा में शुक्रवार को महिला आरक्षण से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर वोटिंग प्रस्तावित है, जिसे केंद्र सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक और संसदीय टेस्ट माना जा रहा है। इन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है, लेकिन मौजूदा आंकड़ों के अनुसार सरकार के पास अभी भी आवश्यक संख्या से करीब 67 वोट कम बताए जा रहे हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार विपक्ष का समर्थन हासिल कर पाती है या नहीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा, “यह देश की नारी शक्ति की सेवा और उनके सम्मान का बहुत बड़ा अवसर है। उन्हें नए अवसरों से वंचित न करें। अगर यह संशोधन सर्वसम्मति से पारित होता है, तो देश की नारी शक्ति और लोकतंत्र दोनों मजबूत होंगे।” उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर इस बिल के पक्ष में मतदान करें और इतिहास रचने में भागीदार बनें।
महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देना है। लंबे समय से इस मुद्दे पर बहस होती रही है और अब इसे लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है।
हालांकि, इस बिल को लेकर विपक्ष की ओर से कुछ आपत्तियां भी सामने आई हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार महिला आरक्षण के साथ-साथ परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़े प्रावधानों को जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। उनका आरोप है कि बिना जनगणना के परिसीमन कराना संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ हो सकता है।
विपक्ष का यह भी कहना है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार को मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही महिलाओं को आरक्षण देने पर विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि डिलिमिटेशन की प्रक्रिया को इससे अलग रखा जाना चाहिए, ताकि किसी भी तरह का क्षेत्रीय या राजनीतिक असंतुलन न पैदा हो।
वहीं, सरकार का पक्ष है कि परिसीमन एक आवश्यक प्रक्रिया है, जिससे जनसंख्या के आधार पर सीटों का उचित बंटवारा सुनिश्चित किया जा सके। सरकार ने पहले ही स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से लागू किया जाएगा।
कुल मिलाकर, महिला आरक्षण बिल पर आज होने वाली वोटिंग न सिर्फ संसद के लिए बल्कि देश के लोकतांत्रिक इतिहास के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षण साबित हो सकती है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह विधेयक व्यापक समर्थन के साथ पारित होता है और क्या देश की आधी आबादी को लंबे समय से प्रतीक्षित राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल पाता है।

