30 Oct 2026, Fri
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‘गर्व है’ एथलीट प्रज्ञानंद नॉर्वे चेस जीतने वाले पहले भारतीय, गौतम अडानी ने दी बधाई

ओस्लो/नई दिल्ली: भारतीय शतरंज के युवा सितारे आर. प्रज्ञानंद ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। 20 वर्षीय ग्रैंडमास्टर ने नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। इसके साथ ही वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। शतरंज की दुनिया में नॉर्वे चेस को सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में गिना जाता है, जिसे अक्सर “चेस का विंबलडन” भी कहा जाता है।

ओस्लो में आयोजित इस टूर्नामेंट में प्रज्ञानंद ने दुनिया के कई शीर्ष खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए खिताब अपने नाम किया। उन्होंने विश्व नंबर-1 मैग्नस कार्लसन, मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश, अलीरेज़ा फिरोज़ा, वेस्ली सो और विंसेंट कीमर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान उनकी रणनीति, धैर्य और आत्मविश्वास ने सभी को प्रभावित किया।

प्रज्ञानंद की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह रही कि उन्होंने मेजबान और पांच बार के विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन को एक ही टूर्नामेंट में दो बार हराया। इसके अलावा उन्होंने विश्व चैंपियन गुकेश के खिलाफ भी महत्वपूर्ण क्लासिकल मुकाबले में जीत दर्ज की। इन जीतों ने उन्हें खिताब की दौड़ में मजबूती से बनाए रखा।

टूर्नामेंट के अंतिम दौर में प्रज्ञानंद का मुकाबला भारतीय ग्रैंडमास्टर अर्जुन एरिगैसी से हुआ। यह मुकाबला ड्रॉ रहा, लेकिन इसके बाद खेले गए आर्मागेडन टाईब्रेकर में प्रज्ञानंद ने शानदार जीत दर्ज की। इस जीत ने उन्हें अंक तालिका में शीर्ष स्थान दिलाया और नॉर्वे चेस का ऐतिहासिक खिताब उनके नाम हो गया।

इस शानदार उपलब्धि पर उद्योगपति और अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने प्रज्ञानंद को बधाई दी। उन्होंने कहा कि नॉर्वे चेस जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद गौरव की बात है। अडानी ने कहा कि प्रज्ञानंद ने अपने धैर्य, बुद्धिमत्ता और अद्भुत खेल भावना से भारत का नाम विश्वभर में रोशन किया है।

अडानी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अडानी ने भी युवा ग्रैंडमास्टर की सराहना करते हुए कहा कि यह भारतीय खेल जगत के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रज्ञानंद की सफलता देश के लाखों युवाओं को प्रेरित करेगी और शतरंज के प्रति उनकी रुचि बढ़ाएगी।

गौरतलब है कि नॉर्वे चेस टूर्नामेंट की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी। इतने वर्षों में कई भारतीय दिग्गज खिलाड़ी इसमें हिस्सा ले चुके हैं, जिनमें विश्वनाथन आनंद और डी. गुकेश जैसे बड़े नाम शामिल हैं। हालांकि, अब तक कोई भी भारतीय इस प्रतिष्ठित खिताब को जीत नहीं पाया था। प्रज्ञानंद ने यह उपलब्धि हासिल कर भारतीय शतरंज इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत भारतीय शतरंज के स्वर्णिम भविष्य का संकेत है। प्रज्ञानंद, गुकेश और अर्जुन एरिगैसी जैसे युवा खिलाड़ी लगातार विश्व स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और भारत को शतरंज की नई महाशक्ति बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।

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