संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन राज्यसभा में हल्द्वानी में कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में उनके भाषण के बाद जिस मंच से उन्होंने सभा को संबोधित किया था, उसका हवन कराकर शुद्धिकरण कराया गया। खरगे ने इस घटना को लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना के खिलाफ बताया।
इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने जवाब देते हुए कहा कि भाजपा इस तरह की किसी भी गतिविधि का समर्थन नहीं करती। उन्होंने मामले की जांच कराने का आश्वासन भी दिया।
खरगे ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा
राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह हाल ही में हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित करने गए थे, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
खरगे ने सदन में कहा कि उन्होंने अपने भाषण में किसी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की थी। उन्होंने केवल सरकार की नीतियों और जनहित के मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। इसके बावजूद उनके भाषण के बाद मंच पर हवन कराकर उसे शुद्ध करने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा, “क्या लोकतंत्र में ऐसा होता है? मैं विपक्ष का नेता हूं। अगर मेरे भाषण के बाद मंच का शुद्धिकरण कराया गया है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। संविधान और लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा की बात करने वाले लोग इस तरह की घटनाओं को कैसे सही ठहरा सकते हैं?”
जेपी नड्डा ने दिया जवाब
खरगे के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता जेपी नड्डा ने कहा कि यदि ऐसी कोई घटना हुई है, तो यह दुखद है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा इस तरह की गतिविधियों का समर्थन नहीं करती।
नड्डा ने कहा, “खरगे जी ने जो बात कही, वह हम सभी के लिए दुखद है। भाजपा कभी भी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। यदि वहां ऐसा कुछ हुआ है, तो उसकी जांच कराई जाएगी।”
उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मामले को देखा जाएगा और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। नड्डा ने यह भी कहा कि यदि इस घटना से खरगे की भावनाएं आहत हुई हैं, तो यह खेदजनक है।
हल्द्वानी की रैली बनी राजनीतिक मुद्दा
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब उत्तराखंड में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। उल्लेखनीय है कि 8 अगस्त को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने हल्द्वानी में ‘विजय शंखनाद रैली’ को संबोधित किया था। इसी पृष्ठभूमि में कथित शुद्धिकरण की घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।
कांग्रेस इस मुद्दे को लोकतांत्रिक गरिमा और विपक्ष के सम्मान से जोड़कर देख रही है, जबकि भाजपा ने आधिकारिक तौर पर इस तरह की किसी भी कार्रवाई से खुद को अलग बताते हुए जांच का आश्वासन दिया है।
सियासी हलकों में बढ़ी चर्चा
राज्यसभा में उठे इस मुद्दे के बाद हल्द्वानी की घटना राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि भाजपा की ओर से जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या इस मामले में कोई आधिकारिक कार्रवाई की जाती है।
फिलहाल इस मुद्दे ने मानसून सत्र के आखिरी दिन संसद के माहौल को गर्म कर दिया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली।

