रियलिटी शो ‘लॉक अप 2’ और ‘स्प्लिट्सविला X6’ से पहचान बनाने वाली आकांक्षा चौधरी ने अपनी मिस यूनिवर्स जर्नी को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि ब्यूटी पेजेंट की तैयारी के दौरान उन्हें अपने चेहरे के लुक को लेकर काफी दबाव महसूस हुआ। आकांक्षा के अनुसार, उन्हें बार-बार कहा गया कि इस इंडस्ट्री में सफल होने के लिए चेहरा ज्यादा शार्प और तराशा हुआ दिखना चाहिए। इसी दबाव में उन्होंने ‘बकल फैट रिमूवल’ और चेहरे की चर्बी कम करने वाले ट्रीटमेंट पर हजारों रुपये खर्च किए।
हाल ही में एक बातचीत के दौरान आकांक्षा ने अपने लुक को लेकर हो रही चर्चाओं पर खुलकर बात की। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही उन अफवाहों को भी खारिज किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि उन्होंने नाक की सर्जरी करवाई है।
‘मैंने नोज जॉब नहीं करवाया’
आकांक्षा ने कहा कि सोशल मीडिया पर कई लोग उनके चेहरे की तुलना पुरानी तस्वीरों से कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि उन्होंने नोज जॉब करवाई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने ऐसी कोई सर्जरी नहीं करवाई।
हालांकि, उन्होंने यह जरूर स्वीकार किया कि मिस यूनिवर्स की तैयारी के दौरान उन्होंने अपने चेहरे को अधिक शार्प दिखाने के लिए बकल फैट रिमूवल कराने के बारे में गंभीरता से विचार किया था।
शार्प चेहरे के लिए महसूस किया दबाव
आकांक्षा ने बताया कि जब उन्होंने ब्यूटी पेजेंट की तैयारी शुरू की, तब कई लोगों ने उन्हें सलाह दी कि उनके गाल ज्यादा भरे हुए हैं और उन्हें कम करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “मुझे हजारों बार कहा गया कि तुम्हें अपने गाल कम करने होंगे। इस इंडस्ट्री में सिर्फ तराशा हुआ चेहरा ही चलता है।”
लगातार मिल रही ऐसी सलाह ने उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित किया और उन्होंने इस कॉस्मेटिक प्रोसीजर के बारे में जानकारी जुटानी शुरू कर दी।
मुंबई आकर डॉक्टर से ली सलाह
आकांक्षा के अनुसार, उन्होंने इस प्रक्रिया के लिए पैसे बचाना शुरू कर दिया था। वह विशेष रूप से मुंबई आईं ताकि डॉक्टर से सलाह ले सकें और यह ट्रीटमेंट करवा सकें।
उन्होंने बताया कि पैसे बचाने के लिए उन्होंने अपने खर्चों में कटौती की। यहां तक कि एक समय ऐसा भी था जब वह दिन में केवल एक बार तरबूज खाकर काम चला रही थीं।
40 से 60 हजार रुपये किए खर्च
आकांक्षा ने खुलासा किया कि उन्होंने चेहरे की चर्बी कम करने वाले इंजेक्शन का ट्रीटमेंट करवाया। यह प्रक्रिया करीब चार से पांच हफ्ते तक चली।
उन्होंने बताया कि इस पूरे ट्रीटमेंट पर उनका करीब 40,000 से 60,000 रुपये तक का खर्च हुआ।
हालांकि, उन्हें इससे कोई खास फायदा नहीं मिला। उन्होंने कहा, “मैंने 4-5 हफ्ते तक यह ट्रीटमेंट करवाया। इंजेक्शन लगाए गए, लेकिन कोई खास नतीजा नहीं निकला।”
आखिर में नहीं करवाई परमानेंट सर्जरी
आकांक्षा ने बताया कि अंत में उन्होंने चेहरे की कोई परमानेंट कॉस्मेटिक सर्जरी नहीं करवाने का फैसला किया। उनका कहना है कि समय के साथ उन्हें यह समझ आया कि किसी भी इंडस्ट्री में सफलता के लिए केवल बाहरी सुंदरता ही मायने नहीं रखती।
उन्होंने इस अनुभव को साझा करते हुए कहा कि कई युवा मॉडल्स और पेजेंट कंटेस्टेंट्स अपने लुक को लेकर अनावश्यक दबाव महसूस करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी कहानी उन लोगों के लिए मददगार साबित होगी जो सामाजिक और पेशेवर दबाव के कारण खुद को बदलने की कोशिश करते हैं।
आकांक्षा चौधरी का यह खुलासा ब्यूटी इंडस्ट्री में मौजूद सौंदर्य मानकों और उनसे जुड़े मानसिक दबाव पर एक महत्वपूर्ण चर्चा छेड़ता है।

