महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा के ज्ञान को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। गैर-मराठी भाषी वाहन चालकों को मराठी सीखने के लिए चलाया गया अभियान 15 अगस्त को समाप्त हो गया। अब सरकार अभियान के आंकड़ों की समीक्षा कर आगे की रणनीति तैयार करने जा रही है। नियमों का पालन नहीं करने वाले चालकों के खिलाफ चरणबद्ध कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों ने किया आवेदन
परिवहन विभाग के मुताबिक, मराठी भाषा सीखने के अभियान के दौरान करीब 1 लाख 65 हजार लोगों ने आवेदन किया। इनमें बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सी चालक शामिल रहे। भाषा सीखने और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने वाले चालकों को प्रमाणपत्र भी दिए गए हैं।
सरकार का कहना है कि वाहन चालकों को यात्रियों से सामान्य बातचीत करने और जरूरी जानकारी देने के लिए मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए। इसी उद्देश्य से गैर-मराठी भाषी चालकों के लिए विशेष अभियान चलाया गया था।
1 मई से 15 अगस्त तक चला अभियान
मराठी भाषा ज्ञान को लेकर यह अभियान 1 मई से 15 अगस्त तक चलाया गया। अभियान के दौरान गैर-मराठी भाषी चालकों को मराठी भाषा सीखने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का अवसर दिया गया।
अभियान खत्म होने के बाद अब इसके परिणामों और आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभाग की बैठक भी बुलाई गई है। बैठक में आवेदन करने वाले लोगों, प्रमाणपत्र हासिल करने वाले चालकों और नियमों का पालन नहीं करने वालों से जुड़े आंकड़ों पर चर्चा होगी।
छह महीने की बनेगी नई रणनीति
अभियान के अगले चरण को लेकर सरकार अब करीब छह महीने की कार्ययोजना तैयार करने की तैयारी में है। इसमें यह तय किया जाएगा कि भाषा संबंधी नियमों को किस तरह लागू किया जाए और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएं।
अधिकारियों को अभियान के दौरान सामने आए आंकड़ों के आधार पर आगे की कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की कोशिश है कि नियम लागू करने के साथ-साथ वाहन चालकों को भाषा सीखने का पर्याप्त अवसर भी मिलता रहे।
नियम नहीं मानने पर लाइसेंस निलंबित करने का प्रावधान
तय प्रक्रिया के अनुसार, यदि कोई चालक निर्धारित नियमों का पालन नहीं करता है तो उसे सबसे पहले एक महीने का नोटिस दिया जाएगा। नोटिस की अवधि में नियमों का पालन नहीं करने पर उसके ड्राइविंग लाइसेंस को तीन महीने तक निलंबित किया जा सकता है।
इसके बाद भी नियमों की अनदेखी जारी रहने पर परमिट रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, कार्रवाई तय करने और भाषा संबंधी नियमों के अनुपालन की जांच की जिम्मेदारी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय यानी RTO के अधिकारियों के पास होगी।
भाषा को लेकर गलत जानकारी फैलाने पर भी कार्रवाई
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मराठी भाषा से जुड़े नियमों को लेकर गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने वाले वीडियो और सामग्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों को लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा करने के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा किया जाना चाहिए।
फिलहाल अभियान पूरा होने के बाद सरकार आगे की रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले समय में नियमों के पालन की जांच और कार्रवाई को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

