लंबे समय से अटके किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट को अब आगे बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है। परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच सहमति बनना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए समझौते पर सहमति जताई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इस दिशा में अहम फैसला लिया गया।
किशाऊ डैम परियोजना को कई वर्षों से देश की महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय जल परियोजनाओं में शामिल किया जाता रहा है। परियोजना के पूरा होने से पानी के भंडारण, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही यमुना नदी के प्रवाह और उसके पुनर्जीवन से जुड़े प्रयासों को भी इससे मजबूती मिल सकती है।
टोंस नदी पर बनेगा बहुउद्देशीय बांध
किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट उत्तराखंड में टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस नदी यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है। इस परियोजना के तहत एक बड़े जलाशय का निर्माण प्रस्तावित है, जिसमें पानी का संग्रह किया जाएगा। इस पानी का इस्तेमाल अलग-अलग जरूरतों के लिए किया जा सकेगा।
परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाना है। इससे संबंधित राज्यों के कई इलाकों में कृषि के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा जलविद्युत उत्पादन के जरिए बिजली की जरूरतों को पूरा करने में भी परियोजना की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
छह राज्यों के लिए क्यों अहम है परियोजना?
किशाऊ डैम परियोजना का प्रभाव केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा। जल बंटवारे और परियोजना से मिलने वाले लाभों को लेकर छह राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में परियोजना से जुड़े क्षेत्र हैं, जबकि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली को इसके जल संसाधनों से लाभ मिलने की उम्मीद है।
लंबे समय से अलग-अलग मुद्दों के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही थी। ऐसे में छह राज्यों के बीच सहमति बनना अंतरराज्यीय जल विवादों को कम करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। साझा सहमति से परियोजना के निर्माण, पानी के बंटवारे और वित्तीय जिम्मेदारियों से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है।
यमुना के पुनर्जीवन में भी मदद की उम्मीद
किशाऊ डैम परियोजना से यमुना नदी के पुनर्जीवन को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। जलाशय में पानी के बेहतर प्रबंधन और नियंत्रित प्रवाह के जरिए यमुना में पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे नदी के पर्यावरणीय प्रवाह को बनाए रखने और जल गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों को भी बल मिलने की संभावना है।
अब उम्मीद है कि राज्यों के बीच बनी सहमति के बाद परियोजना को अंतिम मंजूरी की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा। यदि सभी औपचारिकताएं पूरी होती हैं, तो वर्षों से लंबित यह परियोजना धरातल पर आने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकती है। इससे जल सुरक्षा, सिंचाई, बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति जैसे कई क्षेत्रों में दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

