5 Aug 2026, Wed

कलियुग के श्रवण कुमार बने खुशीराम पाल, माता-पिता को पालकी में बैठाकर 15 किमी पैदल ले गए झूमरनाथ धाम

उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से आस्था, सेवा और संस्कार की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने लोगों का दिल जीत लिया है। बार कस्बे के मोतीखेड़ा निवासी खुशीराम पाल ने अपने बुजुर्ग माता-पिता को पालकी में बैठाकर करीब 15 किलोमीटर पैदल यात्रा की और उन्हें प्रसिद्ध झूमरनाथ धाम में भगवान भोलेनाथ के दर्शन कराए। इस भावुक और प्रेरणादायक घटना की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है और लोग खुशीराम की तुलना पौराणिक पात्र श्रवण कुमार से कर रहे हैं।

सावन के पवित्र महीने में जब शिवभक्त कांवड़ यात्रा और जलाभिषेक में जुटे हैं, तब खुशीराम पाल की यह यात्रा सेवा, श्रद्धा और मातृ-पितृ भक्ति का अनूठा उदाहरण बनकर सामने आई है। उनकी इस पहल ने यह संदेश दिया कि माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।

पालकी में बैठाकर निकले भोलेनाथ के दर्शन के लिए

यात्रा की शुरुआत मारुतीधाम, मोतीखेड़ा से हुई। खुशीराम ने सबसे पहले अपने माता-पिता को नए वस्त्र पहनाए और पूरे सम्मान के साथ उन्हें अलग-अलग पालकियों में बैठाया। इसके बाद उन्होंने पालकियों को अपने कंधों पर उठाया और झूमरनाथ धाम की ओर पैदल यात्रा शुरू की।

यात्रा के दौरान आगे ढोल-नगाड़े बजते रहे और पीछे बड़ी संख्या में ग्रामीण ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ चलते रहे। पूरे मार्ग में धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल बना रहा। रास्ते भर लोग इस अनोखी यात्रा को देखने के लिए रुकते रहे और कई स्थानों पर ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया।

माता-पिता ही मेरे लिए भगवान हैं

खुशीराम पाल ने बताया कि उनके लिए माता-पिता ही सबसे बड़े भगवान हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से उनके मन में इच्छा थी कि वे अपने माता-पिता को स्वयं अपने कंधों पर बैठाकर भगवान शिव के दर्शन कराएं। सावन के पवित्र महीने में उन्हें यह संकल्प पूरा करने का अवसर मिला।

उन्होंने कहा कि जीवन में माता-पिता की सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं है और भोलेनाथ की कृपा से उन्हें यह सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनकी इस भावना ने यात्रा को और भी भावनात्मक बना दिया।

ग्रामीणों ने की सराहना

परिवार के सदस्य दिनेश पाल ने बताया कि पालकी में बैठे बुजुर्ग उनके दादा-दादी हैं। परिवार चाहता था कि उन्हें पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ झूमरनाथ धाम ले जाया जाए। उन्होंने कहा कि खुशीराम ने जिस समर्पण और धैर्य के साथ 15 किलोमीटर की पैदल यात्रा की, वह सभी के लिए प्रेरणा है।

यात्रा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग खुशीराम पाल की सेवा भावना, संस्कार और माता-पिता के प्रति समर्पण की जमकर प्रशंसा कर रहे हैं।

सावन में भक्ति और सेवा का संदेश

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा कर गंगाजल लाते हैं और शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। ऐसे समय में ललितपुर से सामने आई यह घटना केवल धार्मिक आस्था की नहीं, बल्कि भारतीय पारिवारिक मूल्यों और माता-पिता के प्रति सम्मान की भी मिसाल बन गई है।

खुशीराम पाल की यह यात्रा यह याद दिलाती है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में भी सेवा, संस्कार और परिवार के प्रति समर्पण जैसे मूल्य आज भी जीवित हैं। उनकी यह पहल समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है और लोगों को माता-पिता के सम्मान और सेवा का महत्व समझा रही है।

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